

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान 13 माह की मासूम बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई और परिजनों के साथ स्थानीय लोगों ने धरना-प्रदर्शन कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
परिजनों के अनुसार, बच्ची को सर्दी-खांसी की शिकायत थी, जिस पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि भर्ती के बाद बच्ची को इंजेक्शन लगाया गया, जिसके तुरंत बाद उसकी हालत बिगड़ गई और वह कोमा में चली गई। परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगाने के दौरान स्टाफ कैनुला भी ठीक से नहीं लगा पा रहा था।
बच्ची की मां और नानी का आरोप है कि इंजेक्शन मेडिकल कॉलेज की छात्रा द्वारा लगाया गया, जबकि मौके पर मौजूद नर्स और डॉक्टर आपस में व्हाट्सऐप कॉल के जरिए काउंसलिंग करते रहे। पिता का कहना है कि हालत गंभीर होने के बावजूद बच्ची का इलाज फोन के माध्यम से निर्देश लेकर किया गया। बाद में उसे आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन कई दिनों तक चले इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।
मौत के बाद परिजनों ने पहले कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और फिर अस्पताल के ट्रामा सेंटर गेट के सामने धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल अधीक्षक से सीधे कार्रवाई की मांग की। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले में जांच टीम गठित करने का आश्वासन दिया। आश्वासन के बाद धरना समाप्त कराया गया।
वहीं, अस्पताल अधीक्षक गोपाल कंवर ने आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि बच्ची निमोनिया से पीड़ित थी और उसका इलाज प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि बच्ची की मौत चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई या इलाज में चूक की वजह से।




