बाराद्वार गौठान में 200 गौवंशों की मौत

बदइंतजामी और बीमारी बनी मौत की वजह, प्रशासन मौन
सक्ति
जिले के बाराद्वार से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है। नगर पंचायत बाराद्वार के गौठान में करीब 200 गौवंशों की मौत का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि यहां कुल लगभग 400 गौवंशों को रखा गया था, जिनमें से आधे अब जीवित नहीं बचे हैं। शेष बचे पशु भी बीमार और कमजोर हालत में हैं।
पूर्व सरकार की गौठान योजना के तहत बाराद्वार में यह गौठान बनाया गया था, जिसका उद्देश्य था— आवारा पशुओं की सुरक्षा, चारा और चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, गौठान में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे और दवाइयों की व्यवस्था नहीं की गई। पानी और आश्रय की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। लगातार बीमारियों और कुपोषण से कई गौवंशों की मौत हो गई।
बताया गया कि शेड निर्माण के लिए सरकारी राशि जारी नहीं हुई, जिसके बाद उस समय की नगर पंचायत अध्यक्ष रेशमा सूर्यवंशी ने अपने अध्यक्ष निधि से अस्थायी शेड बनवाया था, लेकिन बाद में रखरखाव और देखभाल पर ध्यान नहीं दिया गया।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मृत पशुओं को गौठान के पास ही मिट्टी में दबा दिया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य व स्वच्छता का संकट भी पैदा हो गया है।

लोगों में भारी आक्रोश है और यह सवाल उठ रहा है कि जब गौठान योजना का उद्देश्य ही पशुओं की सुरक्षा और संवर्धन था, तो इस तरह की लापरवाही और मौतों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है — क्या दोषियों पर जवाबदेही तय होगी या फिर यह मामला भी कागज़ों में दबकर रह जाएगा।
मालिक राम, चरवाहा
“हम रोज सुबह से रात तक गौठान में रहते हैं, पर चारे की भारी कमी है। कई जानवर भूख और बीमारी से मर गए। कई दिन से अधिकारियों को बताया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
अभिषेक राय, नेता प्रतिपक्ष, नगर पंचायत बाराद्वार
“यह सरकार की बड़ी लापरवाही है। गौठान योजना का नाम लेकर पैसे खर्च किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं। प्रशासन को तुरंत जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करनी चाहिए।”
बाराद्वार गौठान की यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि योजनाओं के नाम पर जवाबदेही का अभाव किस तरह से निर्दोष पशुओं की जान ले रहा है।
अब देखना होगा कि इस गंभीर प्रकरण पर जिला प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।




