बिलासपुर

अवैध खनन से 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर, हाईकोर्ट सख्त: लीज एरिया के बाहर उत्खनन पर रोक; खनिज सचिव से मांगा शपथपत्र

बिलासपुर/रायपुर

रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र के ग्राम निसदा में कथित अवैध खनन मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने लीज क्षेत्र (Lease Area) के बाहर हो रहे उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खनिज विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र (Affidavit) दाखिल करने का आदेश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को निर्धारित की गई है।
400 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित, महानदी में डंपिंग का आरोप
जनहित याचिका में दावा किया गया है कि अवैध खनन के कारण लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर होने की स्थिति में पहुंच गई है। आरोप है कि खनन के दौरान निकला माइनिंग वेस्ट और पत्थर सीधे महानदी में डाले जा रहे हैं, जिससे नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है और पर्यावरणीय नुकसान बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार ब्लास्टिंग और भारी मशीनों के उपयोग से क्षेत्र की जमीन की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हुई है।

क्या है पूरा मामला?
आरंग के ग्राम निसदा निवासी ओम प्रकाश सेन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका के अनुसार, गांव में फ्लैग स्टोन और चूना पत्थर के उत्खनन के लिए 15 लोगों को लीज प्रदान की गई थी।
लेकिन आरोप है कि लीजधारकों ने स्वीकृत क्षेत्र से करीब पांच गुना अधिक जमीन पर अवैध कब्जा कर खनन शुरू कर दिया।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पर्यावरणीय अनुमति (Environmental Clearance) तीन वर्ष पहले समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद क्षेत्र में उत्खनन और ब्लास्टिंग जारी है।
राज्य सरकार का पक्ष: 30 करोड़ रुपए का नोटिस
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कलेक्टर स्तर पर जांच कराई गई थी। जांच में सात लीजधारकों को दोषी पाया गया।
पर्यावरणीय अनुमति समाप्त होने के बावजूद उत्खनन करने के आरोप में सात लीजधारकों को लगभग 30 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
हाईकोर्ट के सख्त सवाल
डिवीजन बेंच ने खनिज विभाग के सचिव को शपथपत्र के माध्यम से यह स्पष्ट करने को कहा है कि:
वर्तमान जांच की स्थिति क्या है
लीज एरिया के बाहर उत्खनन पर क्या कार्रवाई की गई
महानदी में माइनिंग वेस्ट और पत्थर डंप करने वालों के खिलाफ क्या दंडात्मक कदम उठाए गए
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित लीजधारक इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अलग से याचिका दायर करते हैं, तो उसे भी इसी जनहित याचिका के साथ जोड़ा जाएगा।
पर्यावरण और कृषि पर गंभीर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित खनन से न केवल कृषि भूमि की उत्पादकता प्रभावित होती है, बल्कि भूजल स्तर, नदी प्रवाह और स्थानीय जैव विविधता पर भी गंभीर असर पड़ता है।
400 एकड़ भूमि के बंजर होने का दावा सही पाया जाता है तो यह मामला पर्यावरण संरक्षण और खनन नियमों के पालन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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