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“भारत में 80–85% लोग मानसिक स्वास्थ्य इलाज से वंचित: विशेषज्ञों ने चेताया”

भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच का बड़ा गैप है, यानी ज़्यादातर लोग जो मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें समय पर या उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी (IPS) ने 77वीं वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन (ANCIPS 2026) से पहले इस चिंता को उजागर किया। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए अधिक संसाधन, जागरूकता और प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मानसिक रोगी स्वास्थ्य प्रणाली के बाहर ही अपनी बीमारी झेलते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण हैं कलंक, जागरूकता की कमी और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य का पर्याप्त समावेश न होना। IPS ने यह भी बताया कि गंभीर मानसिक रोगों का इलाज संभव है, लेकिन यह तभी सफल होगा जब सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचें।


स्वास्थ्य क्षेत्र में काम तो चल रहा है, लेकिन शिक्षा, प्रशिक्षण और बड़े पैमाने पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मुख्य तथ्य:
लगभग 80–85% मानसिक रोगी इलाज नहीं पा रहे हैं।
मुख्य कारण: जागरूकता की कमी, संसाधनों की कमी और सेवा पहुँच की कठिनाई।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो सामाजिक और आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

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