चांपा की सड़कों पर प्रकृति का अनोखा तोहफा: आम के पेड़ों में मौर की बौछार, पत्ते हुए ओझल

जांजगीर-चांपा / ब्यूरो रिपोर्ट
शहरों में बढ़ते कंक्रीट, ट्रैफिक और प्रदूषण के बीच जब प्रकृति अपनी मौजूदगी दर्ज कराती है, तो वह नज़ारा लोगों के दिलों को छू जाता है। जांजगीर-चांपा जिले के चांपा क्षेत्र में इस साल आम के पेड़ों पर कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है। आमतौर पर शहरों में सीमित हरियाली के बीच रहने वाले लोगों के लिए यह दृश्य किसी सौगात से कम नहीं है।
चांपा के जगदल्ला रोड और जांजगीर-चांपा मुख्य मार्ग पर स्थित दर्राभाठा गांव में एक घर के किनारे लगा आम का पेड़ इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पेड़ पर आम के मौर की इतनी अधिक मात्रा देखने को मिल रही है कि उसके हरे पत्ते लगभग पूरी तरह से नजरों से ओझल हो गए हैं। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरे पेड़ पर पत्तों की जगह सिर्फ पीले-सुनहरे मौर ही छा गए हों।

राहगीरों को रोक रहा है यह नज़ारा
जगदल्ला रोड और दर्राभाठा क्षेत्र से रोज़ गुजरने वाले राहगीर इस दृश्य को देखकर कुछ पल के लिए ठहर जा रहे हैं। लोग न केवल इस अनोखी प्राकृतिक छटा को निहार रहे हैं, बल्कि मोबाइल कैमरों में इसकी तस्वीरें और वीडियो भी कैद कर रहे हैं। कई लोग इसे सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिससे यह पेड़ धीरे-धीरे इलाके की पहचान बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों के लिए भी बना आश्चर्य
पेड़ के आसपास रहने वाले स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने पहले भी आम के पेड़ों में मौर देखे हैं, लेकिन एक ही पेड़ में इस तरह की घनी और भरपूर मौर की बौछार उन्होंने बहुत कम देखी है। लोगों के अनुसार, आमतौर पर पेड़ों पर पत्तों के बीच मौर दिखाई देते हैं, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल अलग है—मौर की अधिकता के कारण पत्ते दिखाई ही नहीं दे रहे।
मौसम बना आम के लिए अनुकूल
कृषि और पर्यावरण से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस वर्ष मौसम आम की फसल के लिए अनुकूल रहा है। सर्दी का संतुलित असर, समय पर तापमान में बदलाव और अपेक्षाकृत सामान्य मौसम ने आम के पेड़ों को बेहतर तरीके से मौर देने में मदद की है। यही कारण है कि इस साल कई इलाकों में आम के पेड़ों पर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक मौर देखने को मिल रहा है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम इसी तरह सामान्य बना रहा, तेज आंधी-तूफान नहीं आए और कीट प्रकोप जैसी समस्याएं नहीं हुईं, तो इस बार आम की पैदावार अच्छी रहने की पूरी संभावना है।
शहरी हरियाली के लिए सकारात्मक संकेत
शहर की सड़कों के किनारे लगे आम के पेड़ों पर इस तरह का मौर आना शहरी पर्यावरण के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह न सिर्फ आने वाली अच्छी फसल की उम्मीद जगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि पेड़ों को संरक्षित किया जाए, तो शहरी क्षेत्रों में भी प्रकृति अपनी पूरी सुंदरता दिखा सकती है।
सुकून और संदेश दोनों
चांपा की सड़कों पर आम के पेड़ों में खिला यह मौर लोगों को सुकून देने के साथ-साथ एक संदेश भी देता है—कि विकास के साथ-साथ हरियाली को बचाना जरूरी है। जब प्रकृति को थोड़ी सी जगह और संरक्षण मिलता है, तो वह शहर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में भी रंग भर देती है।




