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17 साल बाद ‘नकल की टॉपर’ को जेल, पोराबाई कांड में आया ऐतिहासिक फैसला

जांजगीर-चांपा

ब्यूरो रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है, जहां शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाले बहुचर्चित पोराबाई नकल कांड में 17 साल बाद इंसाफ हुआ है।
फर्जी तरीके से बोर्ड परीक्षा की मेरिट लिस्ट में टॉप करने वाली छात्रा पोराबाई और उसके सहयोगियों को अदालत ने दोषी मानते हुए जेल भेज दिया है।


दरअसल मामला साल 2008 का है, जब जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा क्षेत्र की छात्रा पोराबाई ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर सबको चौंका दिया था। लेकिन इस टॉप रैंक के पीछे एक गहरी साजिश छिपी हुई थी।
सच्चाई तब सामने आई जब माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा कराई गई जांच में यह खुलासा हुआ कि टॉप करने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की लिखावट पोराबाई की असली हैंडराइटिंग से मेल नहीं खाती। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि यह सिर्फ नकल नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली के साथ की गई सुनियोजित धोखाधड़ी थी।
इस मामले में जांजगीर-चांपा के द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को 5-5 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है और भ्रष्टाचार व शैक्षणिक जालसाजी की सख्त निंदा की है।
गौरतलब है कि इससे पहले निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था, लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई और पुनः सुनवाई के बाद जनवरी 2026 में अदालत ने दोषियों को सजा सुनाकर न्याय की मुहर लगाई।
यह फैसला न सिर्फ दोषियों के लिए, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए भी एक कड़ा संदेश है।
17 साल भले ही लग गए हों, लेकिन अदालत के इस फैसले ने साबित कर दिया कि ‘जालसाजी से हासिल की गई मेरिट का अंजाम आखिरकार जेल ही होता है।’

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