सक्ती

हसौद थाना पर झूठा मामला दर्ज करने के आरोप — पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच की लगाई गुहार

रिपोर्टर — जय ठाकुर
स्थान — हसौद, जिला सक्ती (छ.ग.)
दिनांक — [12 नवम्बर 2025]

जिला सक्ती के हसौद थाना क्षेत्र से पुलिस कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है।
एक व्यक्ति को कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, लेकिन अब उसके परिवार का दावा है कि यह मामला पूरी तरह झूठा और षड्यंत्रपूर्वक रचा गया है।
पीड़ित पक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

मामला हसौद थाना क्षेत्र का है, जहाँ महेन्द्र मित्तल नामक व्यक्ति को पुलिस ने 70 लीटर कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
लेकिन महेन्द्र मित्तल के भाई रामभगत मित्तल, निवासी ग्राम मल्दा, ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

रामभगत मित्तल का कहना है कि उनका भाई घरेलू काम से हसौद आया था, तभी पुलिस ने बाजार से उसे उठा लिया।
इसके बाद उसकी मोटरसाइकिल को थाना में रखवा दिया गया और उसे करीब डेढ़ घंटे तक थाना क्षेत्र में घुमाया गया।
रामभगत के अनुसार, इस दौरान एक लाख रुपये की मांग भी की गई, और जब राशि नहीं दी गई तो पुलिस ने एक मेकरा ड्राइवर को बुलाकर “पप्पू ढाबा” के पास एक बोरी और लिफाफा रखवाकर झूठा मामला तैयार किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि ढाबे के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई देता है कि पुलिस ने बोरी में पानी भरवाकर फर्जी जब्ती कार्रवाई की।
रामभगत मित्तल ने कहा कि फुटेज लेने के बाद कैमरा बंद करा दिया गया, जबकि पूरे घटनाक्रम की ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके मोबाइल में सुरक्षित है।

पीड़ित परिवार का दावा है कि मल्दा से हसौद मार्ग तक लगे किसी भी कैमरे में शराब या बोरी ले जाने का कोई सबूत नहीं मिला।
उन्होंने पुलिस अधीक्षक सक्ती, उप महानिरीक्षक बिलासपुर, महानिदेशक रायपुर और कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब को शिकायत भेजते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पुलिस का पक्ष
इस मामले पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव ने कहा —

“कल हमारे पास शिकायत मिली है। यह हसौद में आबकारी कार्रवाई से संबंधित है। शिकायत प्राप्त कर ली गई है और इसकी जांच चल रही है। यदि किसी का दोष निकलकर आता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया (रामभगत मित्तल, सरपंच प्रतिनिधि)

“हमारे भाई को झूठे मामले में फँसाया गया है। हमारे पास सबूत हैं कि पुलिस ने बोरी खुद रखवाई थी। हम निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग करते हैं।”

झूठे मामले में फँसाए जाने का यह आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब यह देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस पूरे प्रकरण की जांच कैसे कराते हैं और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

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