किसानों की जेब पर डाका! कापन धान खरीदी केंद्र में वसूली का खेल, पत्रकारिता की आड़ में डराने के आरोप

सरोज रात्रे
लोकेशन:जांजगीर-चांपा जिला कापन
जांजगीर-चांपा जिले के कापन धान खरीदी केंद्र से सामने आई ये तस्वीरें और आरोप
सिर्फ अनियमितता नहीं,
बल्कि किसानों के हक पर खुली डकैती की कहानी बयां कर रहे हैं।
नियम साफ कहते हैं —
40 किलो धान के साथ बोरे का वजन।
लेकिन हकीकत ये है कि
हर बोरे में एक किलो तक की खुली कटौती की जा रही है।
ये गलती नहीं…
ये सिस्टमेटिक वसूली है।
किसानों का कहना है कि
अगर वे कैमरे के सामने आए,
तो उन्हें भविष्य में परेशान किया जाएगा।
इसी डर से कई किसान नाम न छापने की शर्त पर अपनी बात रख रहे हैं।
उनका दावा है —
अगर अधिकारी औचक निरीक्षण करें,
तो सारा सच सामने आ जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
सरकार द्वारा दी जाने वाली
₹2.40 प्रति क्विंटल सुरक्षा राशि आखिर जा कहां रही है?


क्योंकि केंद्र में
न गार्ड है,
न सुरक्षा व्यवस्था,
न कोई निगरानी।
धान भंडारण के नियम भी कागजों तक सीमित हैं।
जहां दो लेयर भूसी जरूरी है,
वहां सिर्फ एक लेयर,
वो भी किनारों पर।
अंदर पूरी तरह नियमों की अनदेखी।
हालात ये हैं कि
यहां किसान अब किसान नहीं रहा,
उसे मजदूर बना दिया गया है।
धान पलटना,
बोरा सिलाई,
तौल —
सब कुछ किसान से ही कराया जा रहा है।
मजदूरी भी किसान की जेब से।
इतना ही नहीं,
धान को खराब बताकर पैसे की मांग,
और न देने पर
धान वापस ले जाने की धमकी तक दी जा रही है।

जब इन गंभीर आरोपों पर
खरीदी प्रभारी से कैमरे पर सवाल किया गया,
तो उन्होंने जवाब देने से इनकार करते हुए कहा —
“जो छापना है, छाप दो।”
अब सवाल सिस्टम से है —
क्या कापन धान खरीदी केंद्र की निष्पक्ष जांच होगी?
या फिर किसानों की ये लूट
ऐसे ही चलती रहेगी?
कैमरा सवाल पूछ रहा है…
और जवाब अब देना ही होगा।




