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आमापारा बागीचा बना आत्मिक ऊर्जा का केंद्र, “वाह ज़िंदगी वाह” शिविर से बदली सोच

के पी चंद्राकर

आमापारा बागीचा, बालोद

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के आमापारा बागीचा में इन दिनों एक ऐसा वातावरण बना हुआ है… जो मन, बुद्धि और आत्मा—तीनों को छू रहा है।यहाँ आयोजित “वाह ज़िंदगी वाह” पाँच दिवसीय शिविर… आत्मिक ऊर्जा का एक सशक्त केंद्र बन चुका है।ब्रह्मा कुमारीज़ आत्मज्ञान द्वारा संचालित यह शिविर… जीवन को भीतर से समझने, सँवारने और नई दिशा देने का अवसर प्रदान कर रहा है।इस शिविर में मार्गदर्शन दे रहे हैं मुंबई से पहुंचे प्रोफेसर ई. वी. गिरीश।सरल भाषा… जीवन से जुड़े उदाहरण… और मन को छू लेने वाली सीख के ज़रिए वे यह समझा रहे हैं कि—जीवन की असली शक्ति… आत्मा में होती है।

उनके सत्र… प्रतिभागियों को आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और आत्मसम्मान की ओर प्रेरित कर रहे हैं।शिविर का मुख्य उद्देश्य है—मन, बुद्धि और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित कर…व्यक्ति को तनाव, भय और नकारात्मकता से मुक्त करना।“स्वास्थ्य आपके हाथों में” जैसे विषय… स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि—मानसिक स्थिति ही… शारीरिक स्वास्थ्य की नींव है।राजयोग मेडिटेशन इस शिविर का विशेष आकर्षण बना हुआ है।बिना किसी शारीरिक अभ्यास के… केवल मन की साधना के माध्यम से…जीवन में शांति और शक्ति दोनों को महसूस कराया जा रहा है।हर वर्ग, हर आयु के लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी यह दर्शाती है कि—यह शिविर मात्र आयोजन नहीं… बल्कि जीवन परिवर्तन की एक सशक्त पहल बन रहा है।

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