
रिपोर्टर-बलराम/लोकेशन- सक्ती
सक्ती जिले के ग्राम कांशीगढ़ में पर्यावरण नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां शासकीय जमीन पर करीब 40 से 50 एकड़ क्षेत्र में राखड़ डंपिंग का खेल बदस्तूर जारी है। जमीन को खोदकर उसमें राखड़ भरी जा रही है, जिससे ग्रामीणों की जिंदगी में धीरे-धीरे “सफेद जहर” घोला जा रहा है।



बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार नदी, नाले और तालाब जैसे जल स्रोतों से 500 मीटर के भीतर राखड़ निपटान पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद ग्राम कांशीगढ़ में तालाब और चारागाह भूमि के बिल्कुल नजदीक बड़े पैमाने पर राखड़ डंपिंग की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल पावर प्लांट, स्थानीय सरपंच और राखड़ कारोबारियों की मिलीभगत से चल रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर शासकीय जमीन पर डंपिंग कैसे संभव हो रही है।
राखड़ के कारण आसपास के खेतों पर बुरा असर पड़ने लगा है। हवा के साथ उड़ती राखड़ से फसलें प्रभावित हो रही हैं और जल स्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। इससे गांव के लोगों की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस अवैध राखड़ डंपिंग पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर गांव की जमीन यूं ही राखड़ माफियाओं के हवाले कर दी जाएगी।




