हनुमान धारा पर राखड़ माफिया का कब्ज़ा? रातों-रात हो रही भराई से पर्यटन स्थल खतरे में, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

चांपा
शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल हनुमान धारा में बीते कई दिनों से रात के अंधेरे में चल रही अवैध राखड़ डंपिंग की गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता की लहर पैदा कर दी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रोज़ाना देर रात कई हाइवा वाहन यहाँ राखड़ पाट रहे हैं, जिससे न सिर्फ़ इस ऐतिहासिक स्थल का स्वरूप बिगड़ रहा है, बल्कि पर्यावरण व स्वास्थ्य को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ा संदेह — मिलीभगत के आरोप
हैरानी की बात यह है कि यह पूरा मामला एसडीएम, तहसीलदार, नगर पालिका और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जानकारी में होने के बावजूद अब तक कोई ठोस रोकथाम नहीं की गई।
नागरिकों का कहना है कि यह पूरा खेल जमीन दलालों, भू-माफियाओं और कुछ विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। आरोप है कि मड़वा प्लांट से निकले राखड़ को चोरी-छिपे शहर में लाखों टन के हिसाब से डाला जा रहा है।
नगर पालिका द्वारा पहले स्लैग चूरी के लिए एनओसी जारी करने की बात भी सामने आई है, लेकिन राखड़ पाटने की अनुमति किसने दी, इस पर कोई भी विभाग खुलकर जवाब नहीं दे रहा। इससे पूरे सिस्टम की भूमिका संदिग्ध नज़र आ रही है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य को गहरा खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक़ बिना अनुमति राखड़ का इस तरह खुले में जमाव—
हवा में सूक्ष्म कणों के फैलाव
फेफड़ों और श्वसन से जुड़ी बीमारियों
जलस्रोतों के प्रदूषण
बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
जैसी समस्याएँ खड़ी कर सकता है।
कभी शांत, सुंदर और धार्मिक महत्व वाला हनुमान धारा अब लगातार नुकसान झेल रहा है। धारा का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने का ख़तरा तेजी से बढ़ गया है।

कलेक्टर के पर्यटन विकास प्रयासों को झटका
जिले के पर्यटन को सशक्त बनाने के लिए प्रशासन की ओर से कई योजनाएँ लागू की जा रही हैं। लेकिन हनुमान धारा में हो रहा यह अवैध कार्य, इन योजनाओं पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का सवाल है—
“अगर प्रशासन सच में पर्यटन विकसित करना चाहता है, तो इस तरह की खुलेआम अवैध गतिविधि कैसे चल रही है?”
नागरिकों की मांग — पारदर्शी जांच और कड़ी कार्रवाई
नागरिक मंचों ने मांग रखी है कि—
राखड़ पाटने की अनुमति किसके आदेश पर दी गई, इसकी स्वतंत्र जांच हो
रात के वाहन व ट्रांसपोर्ट की मॉनिटरिंग, सीसीटीवी, पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए
संदेहास्पद अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
हनुमान धारा का पर्यावरणीय ऑडिट करवाकर संरक्षण की कार्ययोजना लागू की जाए
तहसीलदार का बयान — ‘नोटिस जारी, जांच शुरू’
तहसीलदार चांपा, प्रशांत पटेल ने पुष्टि की है कि—
“राखड़ पाटने की जानकारी मिली है। मड़वा प्लांट को नोटिस जारी किया गया है। पर्यावरण विभाग के अधिकारी को सूचना दे दी गई है। मैं स्वयं जाकर निरीक्षण करूंगा, जांच कर विधिवत कार्रवाई की जाएगी।”
हालाँकि जनता का सवाल है—
“ऐसी बड़े पैमाने की गतिविधि पहले क्यों नहीं रोकी गई? क्या नोटिस ही काफी होगा?”
मड़वा प्लांट की भूमिका पर स्याह बादल
स्थानीय लोगों का मानना है कि स्लैग/फ्लाई ऐश की चोरी और अनधिकृत ट्रांसपोर्ट इस कांड की मुख्य वजह है। यदि प्लांट से निकले अवशेषों का गलत इस्तेमाल हो रहा है तो प्लांट प्रबंधन को भी जांच के घेरे में लाना ज़रूरी होगा।
हनुमान धारा में हो रहा अवैध राखड़ डंपिंग सिर्फ़ एक स्थानीय विवाद नहीं—
यह पर्यावरण, पर्यटन, प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा मुद्दा है।
आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि प्रशासन वास्तव में सख्त कार्रवाई करता है या फिर यह पूरा मामला औपचारिक नोटिसों तक सिमट कर रह जाता है।




