बालोद बस स्टैंड बना गंदगी का केंद्र — यात्रियों का “दुर्गंध से स्वागत”, प्रशासन मौन

विकास की जगह बदबू का प्रतीक बनता बालोद मुख्यालय, जनता में बढ़ता आक्रोश
बालोद (छत्तीसगढ़)।
खनिज संपदा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर बालोद जिला मुख्यालय आज शर्मनाक हालात में है।
जिस नए बस स्टैंड को शहर की पहचान और सुविधा केंद्र बनना था, वह अब गंदगी, बदबू और अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है।
मूत्रालय से फैलती दुर्गंध ने यात्रियों को किया बेहाल
बस स्टैंड परिसर में मूत्रालय की दुर्गंध और सीवर की बदबू इतनी तीव्र है कि यात्रियों को वहाँ कुछ मिनट रुकना भी मुश्किल हो जाता है।
हर दिन हजारों यात्री यहाँ से गुजरते हैं, पर साफ-सफाई की हालत देखकर बालोद की बदनामी लेकर लौटते हैं।
अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग से बढ़ी परेशानी
बस स्टैंड के आसपास ठेले, अस्थायी दुकानें और बेतरतीब पार्किंग ने अव्यवस्था की स्थिति पैदा कर दी है।
यात्रियों के लिए बैठने या प्रतीक्षा करने की जगह तक नहीं बची।
नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका और जिला प्रशासन ने जैसे जिम्मेदारी से मुँह मोड़ लिया है।
कई बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई सफाई अभियान या सुधार कार्य शुरू नहीं किया गया।
अब जनता सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सवाल कर रही है —
“क्या बालोद सिर्फ भाषणों और कागज़ों में ही विकसित रहेगा, या कभी सच में भी स्वच्छ बनेगा?”




