बस्तर की पहचान बारूद नहीं, समृद्ध संस्कृति और विरासत: बस्तर पंडुम 2026 में बोले अमित शाह

जगदलपुर/बस्तर
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की असली पहचान बारूद और नक्सल हिंसा नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति, विरासत और जनजातीय परंपराएं हैं। वे मंगलवार को बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग मौजूद रहे।
अमित शाह ने कहा कि जो बस्तर कभी नक्सलियों के डर और IED विस्फोटों से सहमा रहता था, आज वहीं 55 हजार आदिवासी भाई-बहन गीत, नृत्य, खान-पान, नाटक, वेशभूषा और वन औषधि जैसी 12 विधाओं के माध्यम से अपनी संस्कृति को पुनर्जीवित कर रहे हैं।
7 से बढ़ाकर 12 विधाएं, 55 हजार प्रतिभागियों की भागीदारी
गृह मंत्री ने बताया कि पिछली बार बस्तर पंडुम में 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित हुई थीं, जबकि इस बार 5 नई विधाएं जोड़कर कुल 12 विधाओं में आयोजन किया गया। सात जिलों की 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से लगभग 55 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
उन्होंने कहा कि बस्तर जैसी सांस्कृतिक विविधता विश्व में दुर्लभ है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है।
“प्रधानमंत्री मोदी का विजन है बस्तर की संस्कृति को वैश्विक पहचान”
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि बस्तर की कला, संस्कृति और जनजातीय परंपराएं देश और दुनिया के सामने पहुंचे। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल किताबों में नहीं होता, बल्कि जनमानस की स्मृतियों में जीवित रहता है।
शाह ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने और 150वीं जयंती वर्ष को ‘जनजातीय गौरव वर्ष’ घोषित करने जैसे कदम आदिवासी सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
200 करोड़ का ट्राइबल म्यूजियम, 5 लाख वन उत्पादों की ब्रांडिंग
गृह मंत्री ने कहा कि 200 करोड़ रुपये की लागत से ट्राइबल म्यूजियम की स्थापना की गई है, जहां स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले जनजातीय नायकों की स्मृतियों को संरक्षित किया गया है। साथ ही 5 लाख से अधिक वन उत्पादों और पारंपरिक शिल्प की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि बस्तर और आसपास के कई जनजातीय व्यक्तित्वों को पद्म पुरस्कार देकर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है।
नक्सलियों से अपील: हथियार छोड़ें, पुनर्वास मिलेगा
अमित शाह ने नक्सलवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आदिवासी किसानों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की और कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों के लिए आकर्षक पुनर्वास पैकेज उपलब्ध है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग गांवों में हिंसा करेंगे, IED लगाएंगे या स्कूल-अस्पताल जलाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। “हथियार का जवाब हथियार से दिया जाएगा,” उन्होंने कहा।
बस्तर बनेगा पर्यटन और उद्योग का केंद्र
गृह मंत्री ने घोषणा की कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। एडवेंचर टूरिज्म, होम-स्टे, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी नई पर्यटन गतिविधियां शुरू होंगी।
उन्होंने कहा कि 3500 करोड़ रुपये की रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। इंद्रावती नदी पर 36 करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई योजना लाई जाएगी, जिससे 120 मेगावाट बिजली उत्पादन भी होगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी पर जोर
अमित शाह ने कहा कि बस्तर में 40 वर्षों से बंद स्कूलों को फिर से खोला गया है। आने वाले पांच वर्षों में आदिवासी क्षेत्रों को विकास के नए आयाम से जोड़ा जाएगा। हर 5 किलोमीटर पर बैंक या पोस्ट ऑफिस, गांव-गांव मोबाइल टावर और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आज बस्तर में कर्फ्यू जैसा माहौल नहीं है, बल्कि गांवों में रात को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रौनक दिखाई देती है।
“हर आदिवासी का धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा”
गृह मंत्री ने कहा कि आदिवासी किसानों का धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो अनाज मुफ्त दिया जाएगा। साथ ही हर घर तक नल-जल, गैस सिलेंडर और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी।




