‘आहट’ से पहले टीवी पर दिखा डर का असली रूप, इस हॉरर शो ने 37 साल पहले दर्शकों को किया था हैरान

एक दौर था जब टीवी पर सीमित कंटेंट हुआ करता था, लेकिन उसका असर बेहद गहरा होता था। दूरदर्शन के समय में हर कार्यक्रम अपने तय वक्त पर प्रसारित होता था और पूरा परिवार उसे एक साथ देखता था। उसी दौर में एक ऐसा हॉरर शो आया, जिसने भारतीय टेलीविजन पर रहस्य और डर की नई पहचान बनाई। यह शो ‘आहट’ से भी पहले 1989 में प्रसारित हुआ था और आज भी दर्शकों के बीच याद किया जाता है।
दूरदर्शन का रहस्यमयी शो
1989 में दूरदर्शन पर आया यह हॉरर सीरियल देर रात प्रसारित होता था। इसके शुरू होते ही माहौल गंभीर हो जाता था और दर्शक पूरी तरह कहानी में डूब जाते थे। यह शो हफ्ते में सिर्फ एक दिन आता था, लेकिन हर एपिसोड अपनी अलग पहचान छोड़ जाता था। सीमित संसाधनों के बावजूद इसकी कहानी और प्रस्तुति दर्शकों को अंत तक बांधे रखती थी।
कहानी में छुपा रहस्य
इस शो की कहानी एक रहस्यमयी किले के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे स्थानीय लोग भुतहा मानते हैं। कहानी में दिखाया जाता है कि किले से जुड़ी घटनाओं के पीछे कोई अलौकिक शक्ति है या फिर किसी इंसान की सोची-समझी साजिश। हर एपिसोड में रहस्य, जांच और सस्पेंस को इस तरह बुना गया है कि दर्शक आखिरी पल तक सच्चाई जानने के लिए उत्सुक बने रहते हैं।
IMDb पर शानदार रेटिंग
‘किले का रहस्य’ नाम के इस शो को IMDb पर 8.9 की रेटिंग मिली है, जो इसकी लोकप्रियता और कहानी की मजबूती को दर्शाती है। सीरियल में प्रसिद्ध रंगकर्मी, लेखक और अभिनेता पीयूष मिश्रा मुख्य भूमिका में नजर आए थे, जबकि वीरेंद्र सक्सेना भी अहम किरदार में दिखाई दिए थे।
आज भी यादगार
आज जब ओटीटी और टीवी पर ढेरों हॉरर शोज मौजूद हैं, तब भी ‘किले का रहस्य’ को भारतीय टेलीविजन के शुरुआती और प्रभावशाली हॉरर शोज में गिना जाता है। यह शो साबित करता है कि मजबूत कहानी और रहस्यपूर्ण माहौल के दम पर सीमित साधनों में भी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी जा सकती है




