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ओडिशा SSC पेपर लीक रैकेट पर बड़ी कार्रवाई: बिहार के समस्तीपुर से मास्टरमाइंड का भरोसेमंद साथी गिरफ्तार, इंटर-स्टेट गैंग का खुलासा

समस्तीपुर/भुवनेश्वर

ओडिशा SSC जेईई पेपर लीक मामले में क्राइम ब्रांच ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। बिहार के समस्तीपुर जिले के खानपुर से रैकेट के एक सक्रिय सदस्य राजमोहन प्रसाद को गिरफ्तार किया गया है। ओडिशा क्राइम ब्रांच की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाकर उसे पकड़ा और कोर्ट में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर ओडिशा ले जाया गया।

2023 का पेपर लीक कांड: शुरुआत से झटके में रही पुलिस

ओडिशा कर्मचारी चयन आयोग (OSSC) ने जुलाई 2023 में जूनियर इंजीनियर (JE) की परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा से ठीक पहले प्रश्न पत्र इंटरनेट पर वायरल होने की सूचना मिली।

क्राइम ब्रांच की प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह इंटर-स्टेट पेपर लीक गैंग द्वारा किया गया संगठित अपराध था।

पेपर लीक की सूचना मिलते ही पुलिस ने ओडिशा-बंगाल बॉर्डर के दीघा क्षेत्र में छापेमारी की और 87 अभ्यर्थियों व गिरोह के सदस्यों को प्रश्न पत्र के साथ गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी की कड़ी: बिहार से लेकर बंगाल और आंध्र प्रदेश तक फैला नेटवर्क

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि रैकेट की जड़ें कई राज्यों में फैली हैं।

अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों में—

बिहार

ओडिशा

पश्चिम बंगाल

आंध्र प्रदेश

के सदस्य शामिल हैं।

इसी श्रृंखला में समस्तीपुर का राजमोहन प्रसाद सामने आया, जिसके बारे में क्राइम ब्रांच का दावा है कि वह स्थानीय स्तर पर इस रैकेट को सक्रिय रूप से चलाता था।

गिरोह के प्रमुखों से करीबी संबंध

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि राजमोहन का संबंध इस रैकेट के कुख्यात ऑपरेटर विजेंद्र गुप्ता से है, जिसे 2023 में पकड़ा गया था।

वैशाली और विद्यापतिनगर के उसके सहयोगियों ने पूछताछ में राजमोहन का नाम उजागर किया था।

क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपी—

बिहार TET

कई तकनीकी भर्ती परीक्षाओं

के प्रश्न पत्र लीक कराने में भी शामिल रहा है।

छापेमारी में जब्त हुई थी संदिग्ध कार

क्राइम ब्रांच एएसपी विकास रंजन बेहुरा ने बताया कि हाल ही में की गई जांच के दौरान एक कार जब्त की गई थी, जो राजमोहन के नाम पर रजिस्टर्ड थी।

यह वाहन कई संदिग्ध गतिविधियों में इस्तेमाल होने की आशंका है।

जांच में और गिरफ्तारी की संभावना

जांच अधिकारियों का कहना है कि रैकेट बेहद संगठित है और पेपर लीक के लिए उन्नत तकनीक व बड़े नेटवर्क का उपयोग करता है।

क्राइम ब्रांच की टीम ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में—

और गिरफ्तारियाँ होंगी,

रैकेट के वित्तीय लेनदेन की भी जाँच होगी।

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