जांजगीर-चांपा

राठौर समाज के विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात: 10वीं-12वीं के प्रदेश टॉपर को ₹51,000 का ऐलान

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शिक्षा को सामाजिक उन्नति की सबसे मजबूत नींव बताते हुए राठौर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ग्राम पुटपुरा निवासी विवेक कुमार राठौर (पिता स्व. बिहारी लाल राठौर) ने एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक घोषणा की है। उन्होंने ऐलान किया है कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में यदि राठौर समाज का कोई छात्र या छात्रा कक्षा 10वीं या 12वीं में टॉप-10 मेरिट सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करता है, तो उसे ₹51,000 (इक्यावन हजार रुपये) की नगद सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।

यह घोषणा क्षत्रिय राठौर समाज के विद्यार्थियों के लिए की गई है, जिसका उद्देश्य समाज के बच्चों में शिक्षा के प्रति जागरूकता, प्रतिस्पर्धात्मक भावना और आत्मविश्वास को बढ़ावा देना है। विवेक कुमार राठौर ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा ही समाज को आगे ले जाने का सबसे सशक्त माध्यम है और जब बच्चों को सही समय पर प्रोत्साहन मिलता है, तो वे असाधारण उपलब्धियां हासिल करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मान पूरी तरह मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर दिया जाएगा तथा बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद पात्र विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार कक्षा 10वीं और 12वीं—दोनों के लिए समान रूप से लागू होगा, जिससे दोनों स्तरों के विद्यार्थियों को समान अवसर और प्रेरणा मिल सके।

इस घोषणा के बाद राठौर समाज में हर्ष और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं और अभिभावकों ने इसे दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों को लक्ष्य तय करने और कठिन परिश्रम के लिए प्रेरित करते हैं। अभिभावकों का मानना है कि आर्थिक सम्मान के साथ-साथ यह सामाजिक पहचान विद्यार्थियों के मनोबल को कई गुना बढ़ाएगी।

समाज के युवाओं ने भी इसे केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश बताया कि समाज अपने होनहार बच्चों के साथ खड़ा है। इससे भविष्य में अन्य सामाजिक और जिम्मेदार लोग भी शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए आगे आएंगे।

अंत में विवेक कुमार राठौर ने विद्यार्थियों से अनुशासन, निरंतर मेहनत और शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि जब समाज के बच्चे आगे बढ़ेंगे, तभी समाज और क्षेत्र का समग्र विकास संभव होगा।
यह पहल न केवल राठौर समाज, बल्कि पूरे जांजगीर-चांपा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

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