G20 रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: दुनिया के 1% अमीरों के पास 41% संपत्ति, असमानता ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली | 11 नवम्बर 2025 | छत्तीसगढ़ न्यूज रूम 24 रिपोर्ट
दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में गठित G20 असमानता समिति की ताज़ा रिपोर्ट ने वैश्विक असमानता पर चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 से 2023 के बीच विश्व के शीर्ष 1% संपन्न लोगों ने वैश्विक संपत्ति का 41% हिस्सा अर्जित किया, जबकि नीचे के 50% लोगों को सिर्फ 1% संपत्ति मिली।
यह रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक आर्थिक विकास का लाभ बहुत सीमित वर्ग तक सिमट गया है, जिससे अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार चौड़ी हो रही है।
वैश्विक असमानता की बड़ी तस्वीर
83% देशों में आय असमानता का स्तर “बहुत अधिक” है (गिनी गुणांक 0.4 से अधिक)।
ये देश विश्व की 90% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
चीन और भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि ने असमानता में कुछ कमी तो की है, लेकिन अफ्रीका के उप-सहारा क्षेत्र में गिनी सूचकांक 0.61 दर्ज किया गया है — जो गंभीर असमानता का संकेत देता है।
भारत में शीर्ष 1% संपन्न वर्ग का संपत्ति हिस्सा 2000 से 2023 के बीच 62% तक बढ़ गया है।
भूख और असुरक्षा की बढ़ती खाई
रिपोर्ट में बताया गया कि दुनिया भर में हर 4 में से 1 व्यक्ति (लगभग 2.3 अरब लोग) मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहा है।
वर्ष 2019 से अब तक करीब 335 मिलियन लोग नियमित रूप से भोजन छोड़ने पर मजबूर हुए हैं।
गिनी सूचकांक क्या बताता है?
“गिनी सूचकांक (Gini Index)” असमानता मापने का एक पैमाना है, जिसे 1912 में इतालवी सांख्यिकीविद् कोराडो गिनी ने विकसित किया था।
0 का अर्थ है पूर्ण समानता, जबकि 1 का अर्थ है अधिकतम असमानता।
भारत का गिनी सूचकांक 2011 में 28.8 से घटकर 2022 में 25.5 हुआ है, यानी भारत अभी भी “मध्यम रूप से समानता वाले देशों” में शामिल है।
तुलना में, चीन का 35.7 और अमेरिका का 41.8 है — यानी भारत दोनों से अधिक समानतापूर्ण है।
असमानता बढ़ाने वाले प्रमुख कारण
- आर्थिक उदारीकरण और निजीकरण: वित्तीय विनियमन, कमजोर ट्रेड यूनियन और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण ने गरीब वर्ग को पीछे धकेला।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पूंजी प्रवाह: बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अमीर देशों को फायदा, जबकि गरीब देशों की मजदूरी स्थिर रही।
- संरचनात्मक असंतुलन: औपनिवेशिक विरासत, असमान भूमि स्वामित्व और शिक्षा-अवसरों की कमी अब भी जारी है।
- सामाजिक भेदभाव: जाति, लिंग और वर्ग आधारित भेदभाव गरीब वर्ग की प्रगति को रोकता है। असमानता के गंभीर प्रभाव
गरीबी का स्थायीकरण: सीमित शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसर गरीबों को गरीबी के चक्र में फंसा देते हैं।
आर्थिक अस्थिरता: संपत्ति का केंद्रीकरण निवेश की बजाय सट्टेबाज़ी को बढ़ावा देता है।
स्वास्थ्य संकट: दुनिया के 1.3 अरब लोग स्वास्थ्य खर्च के कारण गरीबी में धकेले गए।
लोकतंत्र पर असर: उच्च असमानता वाले देशों में लोकतंत्र के कमजोर होने की संभावना 7 गुना अधिक होती है। G20 रिपोर्ट ने सुझाए ये बड़े समाधान - अंतर्राष्ट्रीय असमानता पैनल (IPI) की स्थापना – जलवायु परिवर्तन की तरह एक ग्लोबल मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, जो असमानता पर निगरानी रखेगा।
- प्रगतिशील कर व्यवस्था: आय, संपत्ति और उत्तराधिकार पर अधिक कर लगाकर सामाजिक सेवाओं पर खर्च बढ़ाना।
- सामाजिक सुरक्षा नीति: श्रमिक अधिकार, न्यूनतम वेतन और ट्रेड यूनियन की मजबूती।
- वैश्विक वित्तीय सुधार: वैश्विक न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स और सुपर-रिच टैक्स लागू करने की सिफारिश।
- ऋण राहत और विकासशील देशों की सहायता: अत्यधिक ऋणग्रस्त देशों को राहत और जलवायु वित्त तक आसान पहुंच।




