विकास की ओर बड़ा कदम: नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ का पहली बार होगा पूर्ण मैपिंग

बस्तर/नारायणपुर
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दुर्गम माने जाने वाले अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हो गई है। पहली बार इस क्षेत्र का विस्तृत सर्वे और पूर्ण मैपिंग कार्य किया जाएगा। लंबे समय से प्रशासनिक पहुंच से दूर रहे इस इलाके के लिए यह कदम विकास, सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।
अबूझमाड़ क्षेत्र, जो घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दशकों तक नक्शों में भी अधूरा रहा, अब आधुनिक तकनीक की मदद से पूरी तरह मैप किया जाएगा। इस कार्य में सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वे और जियो-स्पेशियल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे इलाके की वास्तविक स्थिति, आबादी, सड़क, जलस्रोत और प्राकृतिक संसाधनों की सटीक जानकारी मिल सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मैपिंग पूरी होने के बाद यहां
सड़क, बिजली और संचार नेटवर्क का विस्तार
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर योजना
सुरक्षा बलों की रणनीति को और प्रभावी बनाने
तथा सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।

सरकार का मानना है कि अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विकास की कमी ही नक्सलवाद की बड़ी वजह रही है। मैपिंग के जरिए पहली बार इस इलाके को मुख्यधारा से जोड़ने की ठोस योजना बनाई जा सकेगी।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी यह मैपिंग बेहद अहम मानी जा रही है। इससे नक्सल गतिविधियों पर निगरानी, ऑपरेशन की योजना और जवानों की सुरक्षित आवाजाही में सुविधा होगी। साथ ही, स्थानीय आदिवासी आबादी को सरकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
कुल मिलाकर, अबूझमाड़ का यह मैपिंग कार्य केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि दशकों से उपेक्षित क्षेत्र को विकास की नई दिशा देने का प्रयास है, जिससे इलाके में शांति, भरोसा और स्थायी विकास की नींव रखी जा सकेगी।




