जांजगीर-चांपा

लाल ईंटों का काला कारोबार: चाम्पा आउटर में फल-फूल रहे अवैध भट्ठे, सरकार को करोड़ों का चूना

लोकेशन – चाम्पा | जांजगीर-चांपा

चाम्पा नगर के आउटर इलाकों में अवैध लाल ईंट भट्ठों का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर लाल ईंटों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।

इन अवैध ईंट भट्ठों में ईंट पकाने के लिए हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता पर भी खतरा मंडरा रहा है। लगातार हो रही कटाई से प्रदूषण बढ़ रहा है और आसपास के गांवों में गर्मी और धुएं का असर साफ नजर आने लगा है।

करोड़ों का कारोबार, बिना GST और बिना बिल

सूत्रों के अनुसार, अवैध भट्ठों में तैयार की जा रही ईंटें दो हजार की खेप पर करीब दस हजार रुपये में बेची जा रही हैं। सालाना यह कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच जाता है, लेकिन यह पूरा लेन-देन बिना जीएसटी बिल के किया जा रहा है।

इससे केंद्र और राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शासकीय और निजी जमीन का अवैध खनन

ईंट निर्माण के लिए शासकीय और निजी जमीनों की मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा है। इससे खेत बंजर हो रहे हैं और जमीन की उर्वरता खत्म होती जा रही है। इसके बावजूद न तो खनिज विभाग कार्रवाई कर रहा है और न ही राजस्व विभाग।

जल संकट के बीच पानी की खुलेआम बर्बादी

क्षेत्र में पहले से ही गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहराता है। तालाब और नल-जल योजना के बोर सूखने की कगार पर रहते हैं, लेकिन ईंट भट्ठा संचालक बोरवेल और तालाबों से पानी खींचकर लाखों ईंटों का निर्माण कर रहे हैं।

इससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मजदूर पंजीयन भी नहीं, कानून की खुली धज्जियां

ईंट भट्ठों में काम कर रहे मजदूरों का श्रम विभाग में पंजीयन तक नहीं कराया गया है, जबकि यह कानूनी रूप से अनिवार्य है। ठेकेदार बिना किसी सुरक्षा और सुविधा के मजदूरों से काम करा रहे हैं, जिससे श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन हो रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि

क्या प्रशासन को इन अवैध भट्ठों की जानकारी नहीं है?

या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखी की जा रही है?

स्थानीय लोगों की मांग है कि अवैध ईंट भट्ठों पर तत्काल कार्रवाई हो, पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन कराया जाए और सरकार को हो रहे राजस्व नुकसान को रोका जाए।

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