
लोकेशन: कोरबा, छत्तीसगढ़
रिपोर्टर: saroj ratre
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को पारदर्शी और किसानों के हित में बताया जाता है… लेकिन कोरबा से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो व्यवस्था की पोल खोलती नजर आती हैं। कोरकोमा, चचिया और कुदमुरा धान खरीदी केंद्रों में किसानों से अवैध वसूली, जबरन हमाली और धान खरीदी प्रक्रिया में अनियमितताओं का गंभीर खुलासा हुआ है। प्रशासन की सख्ती के बावजूद गड़बड़ियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।वीओ—कोरबा ग्रामीण क्षेत्र में कोरकोमा केंद्र पर सूखती के नाम पर किसानों से प्रति बोरा 200 से 300 ग्राम तक अतिरिक्त धान लिया जा रहा है।


तय माप 40.700 किलो होना चाहिए, लेकिन 40.800 से 40.900 किलो तक धान तौलकर वसूला जा रहा है। आरोप ये भी है कि बिना नमी जांच और बिना धान पलटी के ही खरीदी हो रही है, यहां तक कि पुराने और बदरा धान की भी खरीदी की जा रही है।वीओ—किसानों का आरोप है कि हमाली के लिए मजदूर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे, और उनसे ही समिति के लिए धान पलटवाया जा रहा है। वजन मशीन तक किसान को खुद चलानी पड़ रही है। विरोध करने पर खरीदी रोकने की धमकी देना आम बात बन चुकी है। शिकायत पर भैंसमा तहसीलदार के निर्देश पर खाद्य निरीक्षक ने कोरकोमा केंद्र में निरीक्षण किया, जहां ज्यादातर आरोप सही पाए गए।बाइट/संभावित किसानों का बयान—“हमसे ज्यादा धान लेते हैं, हमसे ही हमाली कराते हैं… आवाज उठाओ तो बोलते हैं खरीदी ही रोक देंगे।”वीओ—चौंकाने वाली बात यह है कि खरीदी शुरू होने के एक महीने बाद भी चचिया और कुदमुरा केंद्रों में किसानों के बैठने की व्यवस्था तक नहीं है। शौचालय तक की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि आदिम जाति सहकारी समिति कोरकोमा के प्रबंधक साहू अपने प्रभाव का डर दिखाकर किसानों को चुप कराते हैं।क्लोजर—अब बड़ा सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट के बाद क्या समिति प्रबंधक पर कार्रवाई होगी? या एक बार फिर यह गंभीर मामला चाय-पानी में निपटा दिया जाएगा? फिलहाल किसान न्याय और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, और हमारी नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी।






