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ब्रेन स्ट्रोक – समय रहते करें कार्रवाई”: एम्स मंगलगिरी और भारतीय स्ट्रोक एसोसिएशन ने शुरू की नई पहल

विजयवाड़ा

स्ट्रोक को लेकर देशभर में जागरूकता फैलाने और इसके त्वरित उपचार की जरूरत पर जोर देने के लिए भारतीय स्ट्रोक एसोसिएशन (ISA) ने एम्स मंगलगिरी के न्यूरोलॉजी विभाग के साथ मिलकर एक विशेष कार्यक्रम — “ब्रेन स्ट्रोक: कार्य करने का समय” — का आयोजन किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन आईएसए की अध्यक्ष डॉ. पी. विजया ने किया। इस अवसर पर प्रो. सुशील शर्मा, प्रो. दीप्ति वेपाकोम्मा, कर्नल शशिकांत थुम्मा, और डॉ. मुथुवेंकटचलम सहित देशभर के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे।

300 से अधिक चिकित्सक और प्रशिक्षु शामिल
सम्मेलन में आयोजित संवादात्मक सत्रों का नेतृत्व डॉ. अरविंद शर्मा, डॉ. एलेक्स रेबेलो, और मेजर जनरल डॉ. एस. कुमारवेलु जैसे अनुभवी विशेषज्ञों ने किया। इन सत्रों में 300 से अधिक चिकित्सकों और मेडिकल प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।
मुख्य फोकस रहा — स्ट्रोक की शीघ्र पहचान, त्वरित उपचार, और समन्वित चिकित्सा व्यवस्था के माध्यम से मृत्यु दर और विकलांगता को कम करना।

“बीपी जांचें, स्ट्रोक रोकें” अभियान
इसके साथ ही एक समानांतर जन-जागरूकता अभियान भी चलाया गया — “Check BP, Stop Stroke” (बीपी जांचें, स्ट्रोक रोकें)।
विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित रक्तचाप की जांच से स्ट्रोक का खतरा लगभग आधा किया जा सकता है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का प्रमुख कारण है।

“BEFAST” फॉर्मूला से स्ट्रोक की पहचान

आईएसए ने स्ट्रोक के लक्षणों की जल्दी पहचान के लिए “BEFAST” फॉर्मूला को बढ़ावा दिया —
B – Balance: संतुलन का अचानक खो जाना
E – Eyes: आंखों की धुंधलाहट या दृष्टि में समस्या
F – Face: चेहरे का एक हिस्सा लटक जाना
A – Arms: एक हाथ में कमजोरी
S – Speech: बोलने में कठिनाई
T – Time: तुरंत मेडिकल सहायता लें

जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव
कार्यक्रम का समापन इस आह्वान के साथ हुआ कि स्ट्रोक को रोका जा सकता है और इसका उपचार भी संभव है — बशर्ते समय पर पहचान और त्वरित कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों ने सामुदायिक स्वास्थ्य जांच, सार्वजनिक शिक्षा और तेज़ मेडिकल प्रतिक्रिया को इस दिशा में सबसे अहम कदम बताया।

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