राष्ट्रीय

ब्रेकिंग रिपोर्ट | 10 नवंबर ब्लास्ट स्पेशल स्टोरी

लाल किला के पास कार धमाका कैसे हुआ? नमाज से लेकर पार्किंग में 3 घंटे की साजिश तक की पूरी कहानी

लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए कार बम धमाके ने देश को हिला दिया। इस आतंकी हमले में 13 लोगों की मौत और 20 लोग घायल हुए। जांच में अब तक डॉ. मुजम्मिल, डॉ. आदिल, डॉ. शाहीन सहित 8 आरोपी पकड़े जा चुके हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी सामने है—आतंकी उमर ने विस्फोटक से भरी कार को कैसे दिल्ली तक पहुँचाया और उसे एक्टिव कैसे किया?

लाल किला ब्लास्ट की प्लानिंग से लेकर धमाके तक 24 घंटे की पूरी स्टोरी।

कैसे दिल्ली पहुंचा आतंकी उमर?

सीसीटीवी फुटेज के अनुसार,

रात 1:30 बजे उमर की कार नूंह-मेवात रूट पर तेजी से दौड़ती दिखी।

सुबह 8 बजे, वह फरीदाबाद-बदरपुर बॉर्डर के कैमरे में कैद हुआ। पीछे की सीट पर एक काले-सफेद बैग में विस्फोटक रखा था।

उसी दिन दोपहर में वह तुर्कमान गेट के पास दरगाह पहुंचा, जहां उसने नमाज पढ़ी।

सूत्र बताते हैं कि उस समय तक डेटोनेटर या फ्यूज विस्फोटक से कनेक्ट नहीं था, इसलिए सफर के दौरान ब्लास्ट का खतरा नहीं था।

सुनहरी बाग पार्किंग में 3 घंटे–यहीं तैयार किया गया बम

3:19 PM – उमर लाल किला के पास सुनहरी बाग पार्किंग पहुंचा।

6:48 PM – पार्किंग से कार बाहर निकली।

इन साढ़े तीन घंटों में उमर ने कार में बैठकर—

डेटोनेटर को विस्फोटक से जोड़ा

फ्यूज सेट किया

कार की बैटरी को पावर सप्लाई के रूप में कनेक्ट किया

कार के बोनट का दो इंच खुला होना और उसे रस्सी से बांधना, इसी सेटअप का संकेत देता है।

धमाका इतना बड़ा क्यों हुआ?

फॉरेंसिक सूत्रों ने घटनास्थल पर पोटेशियम क्लोरेट जैसे केमिकल मिलने की पुष्टि की है। विशेषज्ञों के मुताबिक:

अमोनियम नाइट्रेट + पोटेशियम क्लोरेट + कार का पेट्रोल/CNG → हाई एक्सप्लोसिव फायर बम

इसी वजह से—

शवों के टुकड़े 300–400 मीटर दूर मिले,

कई पीड़ितों की सुनने की क्षमता खत्म हो गई,

शॉक वेव इतनी तेज थी कि कई वाहन हवा में उछले।

यह धमाका 2005 सरोजिनी नगर ब्लास्ट जैसी समान तकनीक से मिलती-जुलती है।

दीनदार अंजुमन नेटवर्क जैसी साजिश

जांच अधिकारियों को आशंका है कि यह हमला 2000 में हुए दीनदार अंजुमन सीरियल ब्लास्ट पैटर्न जैसा है—

कई शहरों में कारें,

अमोनियम नाइट्रेट आधारित बम,

धार्मिक स्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाके टारगेट।

जांच एजेंसियों के अनुसार इसी तरह का पैटर्न दोबारा सक्रिय हो सकता है।

डॉक्टर कैसे बने आतंकी? 3-स्टेप ब्रेनवॉश मॉडल

जांच में सामने आया है कि पकड़े गए कई आरोपी MBBS डॉक्टर्स हैं।
रिटायर्ड अफसरों के मुताबिक ब्रेनवॉश का पूरा प्रोसेस ऐसे होता है—

धार्मिक बातचीत से भरोसा जीतना

नमाज, वजू, धार्मिक कर्तव्यों पर चर्चा

दिलचस्पी दिखाने पर अगला कदम

फेक फोटो-वीडियो से भड़काना

“धर्म खतरे में है” जैसे झूठे नैरेटिव

लगातार प्रचार

जिहाद को महिमामंडित करना

‘जन्नत’, ‘बड़ा पुण्य’, ‘पावर’ जैसी बातें

फिर विदेश में ट्रेनिंग या ऑनलाइन मॉड्यूल

इस तरह एक योग्य डॉक्टर भी “व्हाइट कॉलर टेररिस्ट” बन सकता है।

शाहीन, मुजम्मिल, आदिल… विदेश कनेक्शन भी उजागर

एजेंसियों को शक है कि इस मॉड्यूल को—

दुबई

लंदन

PoK स्थित आतंकी संगठनों

से सहायता मिल रही थी।

डॉ. शाहीन के विदेश भागने की आशंका भी जताई गई है।

यह साजिश देश के लिए कितनी खतरनाक?

जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP का कहना है—

“अगर देश के अंदर पढ़े-लिखे प्रोफेशनल आतंक की राह पकड़ रहे हैं, और दिल्ली तक फिदायीन तैयार हो रहे हैं, तो ये बहुत बड़ा सुरक्षा खतरा है”

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