Budget 2026: सैलरी क्लास को क्या राहत? पुराने बनाम नए टैक्स सिस्टम में संभावित बदलाव

नई दिल्ली | बजट स्पेशल
1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2026 को लेकर सैलरी पाने वाले वर्ग की निगाहें टिकी हुई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार पुराने टैक्स सिस्टम को खत्म करेगी या नए टैक्स सिस्टम को और ज्यादा आकर्षक बनाएगी। टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में कोई बड़ा झटका देने वाला फैसला नहीं होगा, बल्कि सरकार धीरे-धीरे नए टैक्स रेजिम को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकती है।
नए टैक्स सिस्टम पर सरकार का फोकस
जानकारों के मुताबिक, केंद्र सरकार पुराने टैक्स रेजिम को अचानक खत्म करने के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय नए टैक्स सिस्टम में अतिरिक्त सुविधाएं देकर करदाताओं को स्वेच्छा से उसकी ओर आकर्षित करने की नीति अपनाई जा सकती है। संभावित बदलावों में नए टैक्स रेजिम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन में और बढ़ोतरी, कुछ जरूरी खर्चों के लिए सीमित कटौतियां और विवाहित जोड़ों के लिए जॉइंट टैक्स फाइलिंग जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।
मौजूदा स्थिति क्या कहती है
बजट 2025 में नए टैक्स रेजिम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 किया गया था, जिससे सैलरीड क्लास के लिए टैक्स-फ्री इनकम की सीमा प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में होने वाली किसी भी राहत का लाभ मुख्य रूप से नए टैक्स सिस्टम में ही मिलेगा, जिससे दोनों रेजिम के बीच का अंतर और बढ़ सकता है।
सरकारी आंकड़े दे रहे संकेत
वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 72% करदाताओं ने नए टैक्स रेजिम को चुना, जबकि लगभग 28% लोग अब भी पुराने सिस्टम में बने हुए हैं। पुराने रेजिम को चुनने वालों के लिए HRA, होम लोन ब्याज, हेल्थ इंश्योरेंस और एजुकेशन लोन जैसी कटौतियां अब भी बड़ा कारण हैं।
क्या करें सैलरीड टैक्सपेयर
विशेषज्ञों की सलाह है कि बजट 2026 के बाद करदाता अपनी आय, कटौतियों और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर पुराने और नए टैक्स सिस्टम की तुलना करें। कुल मिलाकर संकेत यही हैं कि बजट 2026 में बड़े बदलाव की बजाय नए टैक्स रेजिम को और सरल व आकर्षक बनाने पर जोर रहेगा।




