क्या देर रात फोन चलाना मिर्गी के दौरे का कारण बन सकता है? जानें डॉक्टर क्या कहते हैं

नई दिल्ली
आज की लाइफस्टाइल में सोने से पहले मोबाइल स्क्रोल करना एक आम आदत बन चुकी है। सोशल मीडिया की रील्स हों या दिनभर की खबरें—यही “लेट-नाइट स्क्रॉलिंग” कई लोगों की दिनचर्या बन गई है। National Epilepsy Day 2025 के मौके पर सवाल उठता है—क्या देर रात तक फोन की स्क्रीन देखते रहना मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर सकता है?
इसको लेकर हमने विशेषज्ञों से बात की और जाना कि स्क्रीन की रोशनी, नींद की कमी और मानसिक तनाव कैसे दिमाग को प्रभावित करते हैं।
स्क्रीन की ब्लू लाइट कैसे बढ़ा सकती है जोखिम?
रात में मोबाइल देखने पर आंखें लगातार तेज रोशनी और बदलते विजुअल्स का सामना करती हैं। रील्स, फ्लैशिंग वीडियो और चमकदार ग्राफिक्स—ये सब मिलकर दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को उत्तेजित कर सकते हैं।
डॉक्टर्स के अनुसार:
यह असर खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा होता है जिन्हें फोटोसेंसिटिव एपिलेप्सी होती है।
अचानक फ्लैशिंग लाइट या ब्राइट कंट्रास्ट से सीजर ट्रिगर हो सकते हैं।
भले ही स्क्रॉल करते समय कोई बदलाव महसूस न हो, लेकिन दिमाग पर इसका प्रभाव अंदर ही अंदर बढ़ता जाता है।
सबसे बड़ा ट्रिगर—नींद की कमी
लेट-नाइट स्क्रॉलिंग का सबसे बड़ा नुकसान है नींद का बिगड़ जाना।
फोन की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट:
मेलाटोनिन (sleep hormone) को दबा देती है
सोने का समय आगे खिसक जाता है
दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाता
मिर्गी मरीजों के लिए नींद दिमाग की स्थिरता की रीढ़ होती है।
इसलिए नींद की कमी उनका सबसे बड़ा ट्रिगर बन जाती है।
सोशल मीडिया का तनाव भी बढ़ाता है खतरा
हम आराम करने के लिए फोन उठाते हैं, लेकिन कई बार:
ट्रेंडिंग खबरें,
कमेंट सेक्शन की बहसें,
सोशल मीडिया की तुलना
मानसिक तनाव को बढ़ा देती हैं।
तनाव (stress) अपने आप में मिर्गी के ट्रिगर्स में से एक माना जाता है।
जब तनाव + नींद की कमी + तेज स्क्रीन लाइट
तीनों एक साथ आते हैं, तब दौरे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
क्या करें? डॉक्टर ये सलाह देते हैं
1. सोने से 1 घंटा पहले फोन बंद कर दें
दिमाग को शांत होने का समय मिलता है।
2. स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें और डार्क मोड का इस्तेमाल करें
तेज विजुअल्स से दिमाग को बचाने में मदद मिलती है।
3. नाइट रूटीन बदलें
किताब पढ़ना, हल्का संगीत या मेडिटेशन—दिमाग को सहज बनाते हैं।
4. मिर्गी मरीज ट्रिगर डायरी रखें
कौन-सी चीजें दौरे को बढ़ाती हैं, यह जल्दी समझ आता है।
जागरूकता क्यों जरूरी है?
देर रात फोन चलाना मामूली आदत लग सकती है, लेकिन मिर्गी मरीजों के लिए यह कई बार गंभीर खतरा बन सकती है।
National Epilepsy Day का उद्देश्य यही है—लोग अपनी आदतों को समझें, दिमाग को अनावश्यक थकान या उत्तेजना से बचाएं और समय रहते सावधानी अपनाएं।




