
रिपोर्टर – सरोज रात्रै
लोकेशन – सेंदरीपाली, कोरबा
कोरबा जिले के ग्राम सेंदरीपाली से एक अनोखी और अद्भुत घटना सामने आई है। यहां ग्रामीणों ने किसी मानव शिशु की नहीं, बल्कि हथिनी के बच्चे की छट्ठी मनाई—और आश्चर्य की बात यह रही कि छट्ठी कार्यक्रम के कुछ घंटों बाद ही हाथियों का पूरा झुंड गांव छोड़कर चला गया।
जानकारी के मुताबिक, करीब एक माह पहले गांव के पास एक हथिनी ने बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद से ही 6 से ज्यादा हाथियों का झुंड लगातार दो महीनों से गांव और आसपास डेरा जमाए हुए था। इस दौरान हाथियों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, कई गाय-बैल मौत के घाट उतार दिए और लगातार बिजली गुल रहने से ग्रामीण कई रातें अंधेरे में गुजारने को मजबूर थे।

पड़ोसी गांवों के लोगों का मानना है कि जहां हथिनी बच्चे को जन्म देती है, हाथियों का झुंड लंबे समय तक वहीं रुका रहता है, लेकिन यदि ग्रामीण छट्ठी का पारंपरिक अनुष्ठान कर दें, तो हाथी वह स्थान छोड़ देते हैं।
इसी विश्वास के साथ रविवार को पूरे गांव ने मिलकर पूजा-पाठ किया और हाथी के बच्चे की छट्ठी मनाई। ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही छट्ठी कार्यक्रम पूरा हुआ, उसी रात हाथियों ने गांव की सीमा छोड़ दी। बीती रात न तो हाथियों की कोई आवाज़ आई और न ही कोई गतिविधि दर्ज हुई। लंबे समय बाद गांव में पूरी रात बिजली भी बहाल रही, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
इस बीच, करतला रेंजर ने बताया कि उन्हें छट्ठी कार्यक्रम की जानकारी नहीं है, लेकिन हाथियों का लोकेशन अब रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र की ओर शिफ्ट हो गया है। रेंजर के मुताबिक, हथिनी प्रसव के बाद लगभग एक महीने तक उसी क्षेत्र में रहती है, उसके बाद झुंड आगे बढ़ जाता है।
फिलहाल, सेंदरीपाली गांव में दो महीने बाद शांति लौटी है और ग्रामीण इसे अपनी आस्था, परंपरा और सामूहिक विश्वास का परिणाम मान रहे हैं।




