CGMSC घोटाला: कार्टेल बनाकर टेंडर, 3 गुना कीमत में सप्लाई — 3 और गिरफ्तार

रायपुर
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) घोटाले में ACB/EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा समेत 5 आरोपी पकड़े जा चुके हैं।
नवगिरफ्तार आरोपियों में
अभिषेक कौशल (डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स, पंचकुला),
राकेश जैन (प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर),
प्रिंस जैन (लाइजनर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स; शशांक चोपड़ा का जीजा) शामिल हैं।
जांच में सामने आया है कि “हमर लैब” योजना के तहत मेडिकल उपकरणों और रिएजेंट्स की खरीदी में फर्जी दस्तावेजों के जरिए टेंडर भरे गए और आपसी मिलीभगत से कार्टेल बनाकर प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया गया।
कैसे हुआ घोटाला?
तीनों फर्मों ने एक जैसे प्रोडक्ट डिटेल, पैक साइज और रेट पैटर्न में टेंडर डाले।
मोक्षित कॉरपोरेशन ने सबसे कम दर, उसके बाद RMS और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने कोट किया—ताकि मोक्षित को फायदा मिले।
नतीजा: MRP से 3 गुना तक ज्यादा कीमत पर सप्लाई, जिससे शासन को करीब ₹550 करोड़ का नुकसान।
चौंकाने वाले आंकड़े
₹8 की EDTA ट्यूब ₹2,352 में खरीदी गई।
₹5 लाख की CBS मशीन ₹17 लाख में।
₹300 करोड़ के रिएजेंट्स की खरीदी।
सिर्फ 27 दिनों में ₹750 करोड़ की खरीदी कर सरकार को ₹411 करोड़ का कर्जदार बनाया गया।
कानूनी स्थिति
तीनों आरोपियों को 18 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया।
19 जनवरी को स्पेशल कोर्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेशी के बाद 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड।
ED भी मामले की जांच कर रही है; शशांक चोपड़ा 23 जनवरी तक ED की कस्टोडियल रिमांड पर है।
घोटाला कैसे खुला?
दिसंबर 2024 में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने PMO, गृह मंत्रालय, CBI और ED से शिकायत की। इसके बाद केंद्र के निर्देश पर EOW ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की।
ACB/EOW ने कहा है कि जनहित से जुड़ी “हमर लैब” योजना में शासकीय धन के दुरुपयोग के सभी पहलुओं की जांच जारी है और आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।




