CGPSC भर्ती घोटाला: हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की — चयनित उम्मीदवारों को मिली राहत

छत्तीसगढ़ में चर्चित लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती प्रकरण में हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है। इस फैसले को न्याय-प्रणाली की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के हक में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर पिछले कुछ वर्षों से विवाद चल रहा था। कथित अनियमितताओं और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने इस परीक्षा के नतीजों पर रोक लगाई थी और निर्णय को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।


लेकिन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सरकार की यह अपील खारिज कर दी, और पहले से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को वैध ठहराया है। कोर्ट ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में कोई ठोस अनियमितता सिद्ध नहीं हुई है और अभ्यर्थियों को अब नियुक्ति से वंचित रखना अन्याय होगा।
अदालत के इस फैसले के बाद सैकड़ों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो वर्षों से अपनी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे थे।
CGPSC की यह भर्ती परीक्षा 2021–22 सत्र से जुड़ी बताई जा रही है। इसमें प्रशासनिक सेवा, सहायक संचालक, तहसीलदार, सहायक आयुक्त समेत कई पदों के लिए चयन किया गया था।
परिणाम जारी होने के बाद कुछ उम्मीदवारों ने चयन प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने नियुक्ति पर रोक लगाई थी और मामला अदालत में पहुंचा।
हाईकोर्ट के हालिया फैसले ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा —
“किसी भी अभ्यर्थी को बिना ठोस सबूत के नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। निष्पक्षता का अर्थ यह नहीं कि चयनितों के अधिकारों को अनिश्चितकाल तक रोका जाए।”
अभ्यर्थियों में खुशी की लहर
फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों में उत्साह और राहत का माहौल है।
“हमने वर्षों की मेहनत से परीक्षा पास की थी, अब न्याय ने हमारा साथ दिया है” — एक चयनित अभ्यर्थी ने कहा।
सोशल मीडिया पर भी इस फैसले की खूब चर्चा हो रही है, जहां लोगों ने न्यायपालिका के इस कदम को “निष्पक्षता की जीत” बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने में एक मिसाल बनेगा।
यह न केवल अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा का उदाहरण है, बल्कि सरकारों को यह संदेश भी देता है कि प्रशासनिक निर्णय तथ्यों पर आधारित होने चाहिए, न कि केवल आशंकाओं पर।
CGPSC भर्ती घोटाले में हाईकोर्ट का यह फैसला छत्तीसगढ़ की न्याय-प्रणाली की मजबूती और पारदर्शिता का प्रतीक है। अब जब चयनित अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का रास्ता खुल गया है, राज्य सरकार पर यह जिम्मेदारी है कि वह शीघ्र कार्रवाई कर अभ्यर्थियों को उनका हक दिलाए।




