
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले में एक बार फिर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। तमन सिंह सोनवानी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उनकी दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें सरकारी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि जांच अभी जारी है और आरोपी की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है।
दरअसल, वर्ष 2021 में CGPSC की विभिन्न भर्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, चयन सूची में पसंदीदा अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने, अंकों में हेरफेर और नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप हैं। इसी मामले में तमन सिंह सोनवानी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।


अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि
भर्ती घोटाले का असर हजारों युवाओं के भविष्य पर पड़ा है
आरोपी प्रभावशाली पद पर रह चुका है
गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बनी हुई है
इन दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित और पारदर्शिता को देखते हुए जमानत देना फिलहाल उचित नहीं है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
CGPSC भर्ती घोटाले को लेकर पहले से ही राज्य की राजनीति गर्म है। विपक्ष लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि यह फैसला भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर एक अहम संदेश माना जा रहा है।




