जांजगीर-चांपा

चांपा के ट्रैफिक सिग्नल बने मज़ाक — लाखों की योजना अब शोपीस में तब्दील

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नगर के प्रमुख चौक-चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से वर्षों पहले लगाए गए सिग्नल आज भी महज़ ‘शोपीस’ बनकर खड़े हैं। नगर प्रशासन ने यातायात नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के लिए इन सिग्नलों की स्थापना पर लाखों रुपये खर्च किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से एक भी सिग्नल आज तक चालू नहीं हो पाया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सिग्नल चालू होते, तो सड़क हादसों में कमी आती और यातायात व्यवस्था में अनुशासन दिखता। परंतु आज की स्थिति यह है कि इन सिग्नलों के खंभे सिर्फ दिखावे के लिए लगे हैं — न लाइट जलती है, न कोई नियंत्रण प्रणाली काम करती है।

नगर के प्रमुख चौक जैसे बस स्टैंड चौक, रेलवे स्टेशन रोड, और मुख्य बाजार क्षेत्र में ये सिग्नल लगे तो जरूर हैं, मगर वर्षों से बंद पड़े हैं। इस वजह से आए दिन सड़क पर अव्यवस्था और जाम की स्थिति बनती रहती है। कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, मगर प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

जनता का कहना है कि “सिग्नल तो लगे हैं, पर चालू नहीं हुए… अगर ये चलने लगें तो एक्सीडेंट कम होंगे और नियमों का पालन भी बढ़ेगा।”

प्रशासन की निष्क्रियता अब सवालों के घेरे में है — आखिर जब इन्हें चालू करना ही नहीं था, तो लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह जनता के टैक्स के पैसों का खुला मज़ाक नहीं है?

अब नगरवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद कभी ये सिग्नल जल उठें और व्यवस्था सुधरे। लेकिन फिलहाल तो चांपा में “यातायात सुधार की योजना” सिर्फ बोर्ड और खंभों पर लटकी हुई दिखती है — जैसे शासन की नीतियों का प्रतीकात्मक प्रदर्शन हो।


लगता है चांपा के सिग्नलों की लाल–पीली–हरी बत्तियां अब सिर्फ कागज़ों में जलती हैं… सड़क पर तो बस लालफीताशाही की रोशनी चमक रही है।

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