भारत में बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियाँ

तेजी से बदलते जीवनशैली पैटर्न ने भारत में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कई गुना बढ़ा दिया है। शहरी क्षेत्रों से लेकर छोटे शहरों तक, जिस तेजी से लोग तनाव, मोटापा, डायबिटीज़ और हृदय रोग का शिकार हो रहे हैं, वह विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले एक दशक में लाइफस्टाइल-जनित बीमारियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
बढ़ते केस और खराब दिनचर्या
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबा कार्य समय, लगातार स्क्रीन का इस्तेमाल, फास्ट फूड की बढ़ती आदत और फिजिकल एक्टिविटी की कमी ने स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाया है।
कई अध्ययन यह दर्शाते हैं कि 25 से 40 वर्ष की उम्र वाले लोग अब पहले से ज्यादा थकान, तनाव, नींद की कमी और वजन बढ़ने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
तनाव एक प्रमुख कारण
भारत में बढ़ते तनाव को जीवनशैली संबंधी बीमारियों की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। काम का दबाव, आर्थिक असुरक्षा, रिश्तों में तनाव और सोशल मीडिया पर बढ़ती निर्भरता मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।
डॉक्टर्स के अनुसार, तनाव सीधे तौर पर हृदय रोग, माइग्रेन, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ को बढ़ावा देता है।
भोजन की आदतों में गिरावट
पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक, अनियमित भोजन, जंक फूड का सेवन, अत्यधिक चीनी और पैकेज्ड फूड आज युवा पीढ़ी की सामान्य आदत बन चुकी है।
इसके कारण एनर्जी लेवल कम होना, मोटापा, पाचन संबंधी समस्याएँ और विटामिन की कमी तेजी से बढ़ रही है।

शारीरिक गतिविधि में कमी
वर्क फ्रॉम होम और मोबाइल-केंद्रित जीवनशैली के चलते लोगों में शारीरिक गतिविधि काफी कम हो गई है।
अध्ययनों में पाया गया है कि भारत में लगभग 40 प्रतिशत युवा प्रतिदिन निर्धारित 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी भी पूरी नहीं करते।
यह हृदय रोग, डायबिटीज़ और हॉर्मोनल असंतुलन का जोखिम बढ़ाता है।
सरकार और विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य मंत्रालय नियमित रूप से जीवनशैली में सुधार के लिए अभियान चला रहा है, जिनमें फिट इंडिया मूवमेंट, योग अभियान, और हेल्थ चेकअप कैंप शामिल हैं।
डॉक्टर्स का मानना है कि लोगों को अपने दिन में कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और नींद को प्राथमिकता देनी चाहिए।




