अर्थशास्त्र

“वैश्विक मंदी के बीच चीन का बड़ा आर्थिक दांव: 2026 के लिए विकास, निवेश और उपभोग पर फोकस”

वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती और अनिश्चितता के माहौल के बीच चीन ने 2026 के लिए अपने आर्थिक एजेंडे की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस एजेंडे में चीन सरकार ने साफ किया है कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकता घरेलू उपभोग को बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और निर्यात में स्थिरता बनाए रखना होगी।

चीन की नीति निर्धारक संस्था के अनुसार, वैश्विक मांग में कमी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में चीन अब अपनी अर्थव्यवस्था को बाहरी निर्भरता से निकालकर घरेलू बाजार आधारित विकास मॉडल की ओर और मजबूत तरीके से ले जाना चाहता है।

सरकार का मानना है कि घरेलू खपत बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को मजबूती मिलेगी और आर्थिक विकास को दीर्घकालिक समर्थन मिलेगा। इसके साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और इंडस्ट्रियल सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने की योजना भी एजेंडे का अहम हिस्सा है।

निर्यात के मोर्चे पर चीन ने संकेत दिए हैं कि वह वैश्विक व्यापार में स्थिरता बनाए रखने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और नए बाजारों की तलाश पर काम करेगा। इसका असर आने वाले समय में एशियाई और वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है।

इस घोषणा को वैश्विक निवेशकों और शेयर बाजारों ने गंभीरता से लिया है। माना जा रहा है कि सोमवार से शुरू होने वाले वैश्विक आर्थिक सत्रों और बाजारों में चीन की इस रणनीति को लेकर नई चर्चाएं और संभावित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलेंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह कदम भारत समेत अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए दोहरे संकेत देता है—
एक ओर निवेश और व्यापार के नए अवसर,
तो दूसरी ओर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी की चुनौती।

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