धान खरीदी की उलझनें: रोजगार संकट के साए में नई नीति पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ में इस बार धान खरीदी सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शासन की नीतिगत दिशा और रोजगार की सच्चाई की परीक्षा बन गई है।जहां सरकार मंचों से “रोजगार सृजन” के वादे दोहरा रही है, वहीं ज़मीनी हकीकत यह है कि वर्षों से कार्यरत हजारों कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चितता के घेरे में है।
शासन का नया आदेश बना विवाद का कारण
15 नवंबर से प्रदेश में धान खरीदी शुरू होनी है, लेकिन सरकार द्वारा जारी नए आदेश ने सहकारी समितियों में काम करने वाले कर्मचारियों में गंभीर असंतोष फैला दिया है।आदेश के अनुसार, इस बार धान खरीदी का कार्य सहकारी समितियों के कर्मचारियों के बजाय अन्य विभागों के कर्मचारियों से कराया जाएगा।प्रशासनिक स्तर पर इसे “वैकल्पिक व्यवस्था” बताया जा रहा है, लेकिन व्यवहारिक रूप से यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए रोजगार असुरक्षा का प्रतीक बन गया है, जिन्होंने वर्षों तक मंडियों और फड़ों में यह जिम्मेदारी निभाई है।
10 दिनों से जारी हड़ताल, प्रशासन की चुप्पी बनी सवाल
धान खरीदी कर्मचारी एवं ऑपरेटर संघ पिछले दस दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है।
संघ का आरोप है कि शासन बिना परामर्श और तैयारी के निर्णय ले रहा है।हड़ताल के कारण खरीदी केंद्रों की तैयारी अधर में लटकी हुई है — न फड़ों की सफाई पूरी हो पाई है, न बिजली और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला तो
किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
नीति की अस्पष्टता का सीधा असर अब किसानों पर पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान यह नहीं जान पा रहे हैं कि उनका धान किस दिन, किस केंद्र पर और किसके द्वारा खरीदा जाएगा।खरीदी केंद्रों पर तैयारियों की बजाय ठहराव की स्थिति बनी हुई है|
‘प्रयोगशाला’ बनी धान खरीदी प्रणाली
शासन द्वारा सहकारी समितियों के अनुभवी कर्मचारियों को हटाकर अन्य विभागों के कर्मियों को बैठाने का निर्णय अब एक प्रयोगशाला जैसा प्रयोग प्रतीत हो रहा है।
जहां पहले प्रशिक्षित कर्मचारी व्यवस्था संभालते थे, अब अनुभवहीन कर्मचारियों को एक संवेदनशील आर्थिक प्रक्रिया में लगा दिया गया है।यह कदम सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार और सहकारी तंत्र पर गंभीर प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।
धान खरीदी के लिए नीति अभी भी अस्पष्ट है।कई समितियों को यह तक स्पष्ट नहीं बताया गया कि खरीदी का संचालन किस विभाग के अधीन होगा।
अग्रिम राशि की मंजूरी, सफाई कार्य, सामग्री की उपलब्धता — सब कुछ ठहराव की स्थिति में है।
ऐसे में सवाल उठता है —क्या शासन धान खरीदी की तैयारी कर रहा है या केवल आदेश जारी करने तक सीमित रह गया है?




