ओला इलेक्ट्रिक पर फूटा उपभोक्ताओं का गुस्सा, घटिया क्वालिटी और खराब सर्विस से सैकड़ों परेशान

कटघोरा से उठा सवाल – कब जागेगी ओला कंपनी और प्रशासन?
देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों को भविष्य का समाधान बताया जा रहा है, लेकिन ओला इलेक्ट्रिक स्कूटी इस सपने पर बड़ा सवाल बनकर खड़ी हो गई है।
कटघोरा की सामाजिक कार्यकर्ता व उपभोक्ता प्रतिनिधि आरती नरेंद्र साहू ने ओला इलेक्ट्रिक वाहनों की घटिया गुणवत्ता, सुरक्षा में लापरवाही और बदहाल आफ्टर-सेल्स सर्विस को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
यह कोई एक उपभोक्ता की शिकायत नहीं, बल्कि सैकड़ों परेशान ग्राहकों की सामूहिक पीड़ा है।
कभी बैटरी फेल, कभी सॉफ्टवेयर खराब, तो कभी अचानक बंद होती स्कूटी — ओला इलेक्ट्रिक स्कूटी अब सुविधा नहीं, बल्कि मुसीबत बनती जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल – जब बार-बार शिकायतें, विरोध और प्रदर्शन हो चुके हैं, तो फिर सुधार क्यों नहीं?
क्या ओला कंपनी को उपभोक्ताओं की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं?
क्या सिर्फ विज्ञापन और बिक्री ही कंपनी का लक्ष्य है?
कई मामलों में शोरूम और सर्विस सेंटर उपभोक्ताओं को टालते नजर आते हैं, शिकायतों का समाधान महीनों तक नहीं होता।
लोगों का भरोसा टूट चुका है और ओला कंपनी के खिलाफ आक्रोश सड़कों तक पहुंच चुका है।
अब सवाल सिर्फ कंपनी पर नहीं, शासन-प्रशासन पर भी है —
क्या उपभोक्ताओं की सुरक्षा ऐसे ही दांव पर लगती रहेगी?
क्या शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होगी?
आरती नरेंद्र साहू ने मांग की है कि ओला इलेक्ट्रिक स्कूटी कंपनी के खिलाफ सख्त जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और उपभोक्ताओं को न्याय मिले।
यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला सिर्फ शिकायत नहीं, बड़ा उपभोक्ता आंदोलन बन सकता है।
इलेक्ट्रिक वाहन तभी भविष्य हैं, जब वे सुरक्षित हों — वरना यह भविष्य नहीं, खतरा है!




