जांजगीर-चांपा

मां जगदम्बा के एक अक्षर के निरंतर जप से मिलती है कृपा, अज्ञानी भी बन सकता है महाज्ञानी — आचार्य अशोक तिवारी

रिपोर्टर – सुधांशु मिश्रा
लोकेशन – सिवनी

दुर्गा मंदिर सिवनी में गुप्त नवरात्रि के अवसर पर चल रही देवी भागवत कथा के दूसरे दिवस व्यासपीठ से आचार्य अशोक तिवारी ने मां जगदम्बा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति मां के एक अक्षर का भी मंत्र रूप में निरंतर उच्चारण करता रहे तो उस पर देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और अज्ञानी भी महाज्ञानी बन सकता है। आचार्य तिवारी ने सत्यव्रत की कथा सुनाते हुए बताया कि देवदत्त का पुत्र गोभिल मुनि के शाप से मूर्ख हो गया था, समाज की निंदा से दुखी होकर वह वन चला गया और वहां सत्य बोलने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के बल पर उसके मुख से निकले शब्द सरस्वती बीज मंत्र बन गए और देवी सरस्वती की कृपा से उसे समस्त विद्या की प्राप्ति हुई। कथा में आचार्य ने नवरात्र पूजा और कन्या पूजन का विस्तार से विधान बताते हुए कहा कि दो से दस वर्ष तक की कन्याओं का अलग-अलग देवी रूपों में पूजन करने से धन, धान्य, सुख और जीवन के दुखों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने नर-नारायण की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि बद्रिकाश्रम में की गई कठिन तपस्या से इंद्र भयभीत हो गए, लेकिन जगदम्बा की कृपा से कोई विघ्न सफल नहीं हुआ। साथ ही मधु-कैटभ की उत्पत्ति और उनके वध की कथा भी विस्तारपूर्वक सुनाई। दुर्गा मंदिर सिवनी में प्रतिदिन देवी भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ ले रहे हैं।

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