हेल्थ

Creatinine Level High: किडनी डैमेज का छुपा संकेत, बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन क्यों है खतरे की घंटी? जानें लक्षण, कारण और बचाव

किडनी की जांच कराने वाले कई लोगों में एक आम बात सामने आती है—क्रिएटिनिन लेवल का बढ़ जाना। डॉक्टर इसे किडनी फंक्शन बिगड़ने का शुरुआती संकेत मानते हैं। अगर यह समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं और किडनी पर गंभीर दबाव पड़ता है। इसलिए क्रिएटिनिन का सामान्य रेंज में रहना बेहद जरूरी है।


क्रिएटिनिन क्या है और यह क्यों बढ़ता है?

क्रिएटिनिन मांसपेशियों में बनने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है, जिसे किडनी आमतौर पर फिल्टर करके बाहर निकाल देती है। लेकिन जब किडनी कमजोर होने लगती है या उन पर किसी भी वजह से दबाव बढ़ता है, तो क्रिएटिनिन खून में जमा होने लगता है।

इसके बढ़ने की प्रमुख वजहें हैं—

किडनी पर चोट या इंफेक्शन

हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज

डिहाइड्रेशन

प्रोटीन का अत्यधिक सेवन

स्ट्रेन वाली एक्सरसाइज

कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट

विशेषज्ञों के अनुसार मसल मास, डाइट और मेटाबॉलिज्म भी क्रिएटिनिन लेवल को प्रभावित करते हैं। इसलिए सिर्फ क्रिएटिनिन देखकर GFR का अनुमान हमेशा सटीक नहीं होता, लेकिन बढ़ा हुआ स्तर किडनी फंक्शन पर खतरे की ओर जरूर इशारा करता है।


क्रिएटिनिन का सामान्य लेवल कितना होना चाहिए?

हेल्दी वयस्कों में क्रिएटिनिन का रेंज 0.6 से 1.3 mg/dL के बीच माना जाता है।
पुरुषों में यह स्तर थोड़ा अधिक और महिलाओं में कम होता है, क्योंकि यह मसल मास पर निर्भर करता है।


क्रिएटिनिन बढ़ने के शुरुआती लक्षण

अगर आपका क्रिएटिनिन बढ़ रहा है, तो शरीर आपको पहले से संकेत देने लगता है—

लगातार थकान

पैरों और आंखों के पास सूजन

सांस फूलना

पेशाब में बदलाव

सिरदर्द

धुंधली नजर

कमर के निचले हिस्से में दर्द

इन संकेतों को अनदेखा करना किडनी पर खतरा बढ़ा सकता है। किडनी की समस्याएं अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती हैं, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।


कब होता है क्रिएटिनिन खतरनाक?

यदि बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन लंबे समय तक बना रहता है, तो यह गंभीर समस्याओं में बदल सकता है—

क्रॉनिक किडनी डिजीज

किडनी फेलियर

हार्ट से जुड़े खतरे

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन

विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर उपचार और जीवनशैली में सुधार से इस खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।


कैसे नियंत्रित करें बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन?

पर्याप्त पानी पिएं

प्रोटीन और नमक नियंत्रित मात्रा में लें

डायबिटीज और बीपी को नियंत्रित रखें

दर्द निवारक और किडनी को प्रभावित करने वाली दवाएं बिना डॉक्टर की अनुमति के न लें

नियमित जांच कराते रहें

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button