सरगुजा

कार्तिक पूर्णिमा पर उमड़ा जनसैलाब: बाबा भीमसेन हनुमान मंदिर बना आस्था का केंद्र, हर साल बढ़ती है स्वयंभू मूर्ति की ऊँचाई

कार्तिक पूर्णिमा पर आस्था का महाकेंद्र बना स्वयंभू बाबा भीमसेन हनुमान मंदिर

सरगुजा, लुंड्रा

सरगुजा ज़िले के आस्था केंद्र बाबा भीमसेन हनुमान मंदिर, चोरकीडीह लमगांव में आज कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ी। इस पावन मौके पर 108 संगीतमयी हनुमान चालीसा और अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया।

कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर सरगुजा ज़िले के प्रसिद्ध बाबा भीमसेन हनुमान मंदिर, ग्राम चोरकीडीह लमगांव में भक्ति और श्रद्धा का माहौल चरम पर रहा। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भक्त आरती, भजन और हनुमान चालीसा के पाठ में लीन रहे।

प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी मंदिर परिसर में 108 संगीतमयी हनुमान चालीसा और अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया। आयोजन समिति के अनुसार यह परंपरा पिछले 25 वर्षों से निरंतर जारी है और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना कर हनुमान जी के दर्शन किए। सरगुजा ही नहीं, बल्कि सूरजपुर, बलरामपुर और जशपुर ज़िलों से भी हजारों की संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे।

चमत्कारिक मूर्ति पर भक्तों की आस्था

मंदिर के पुरोहितों ने बताया कि चोरकीडीह लमगांव में स्थित बाबा भीमसेन स्वयंभू हनुमान मंदिर की विशेषता यह है कि यहां स्थापित हनुमान जी की मूर्ति हर वर्ष थोड़ी ऊँची होती जा रही है। इसे भक्त चमत्कार और आस्था का प्रतीक मानते हैं।

लोगों का कहना है कि यह मूर्ति किसी मानवीय हस्तक्षेप के बिना प्राकृतिक रूप से आकार में बढ़ती दिखती है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज़ से लोग यहां पहुंचते हैं।

पुजारी, बाबा भीमसेन स्वयंभू हनुमान मंदिर, चोरकीडीह लमगांव

“यहां पिछले 25 वर्षों से लगातार अखंड रामायण पाठ हो रहा है। हनुमान जी की मूर्ति स्वयंभू है और हर साल थोड़ा बढ़ती दिखती है। यह भक्तों के लिए आस्था का सबसे बड़ा प्रमाण है।”

कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह लोक आस्था और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत उदाहरण भी है।

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