अर्थशास्त्र

कच्चा तेल 8% महंगा, अमेरिका–इजराइल–ईरान तनाव से बाजार में उबाल; जानें आज का भाव

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी बेंचमार्क West Texas Intermediate (WTI) फ्यूचर्स करीब 10% तक चढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो आठ महीनों का उच्चतम स्तर है। बाद में कुछ नरमी आई, लेकिन कीमतें अब भी 8% से अधिक बढ़त के साथ कारोबार करती रहीं।
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी नजर
बाजार की नजर खास तौर पर Strait of Hormuz पर है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता है। तेहरान ने जलडमरूमध्य खुले होने का दावा किया है, लेकिन एहतियातन कई शिपिंग कंपनियों ने जहाजों के रूट में बदलाव शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन, इराक और सीरिया जैसे देशों में भी अस्थिरता की आशंका बनी हुई है।
OPEC+ का उत्पादन बढ़ाने का फैसला
इस बीच तेल उत्पादक समूह OPEC+ ने अप्रैल से 2,06,000 बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त उत्पादन पर सहमति जताई है। हालांकि यह वैश्विक मांग का 0.2% से भी कम है, इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे कीमतों पर सीमित प्रभाव पड़ेगा।
100 डॉलर तक जा सकता है ब्रेंट
ब्रिटेन के प्रमुख बैंक Barclays ने बढ़ते जोखिम को देखते हुए ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर 100 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। बैंक ने चेतावनी दी है कि यदि हालात और बिगड़े तो सप्लाई में बाधा से कीमतों में और तेज उछाल आ सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि कच्चे तेल में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। ऐसे में तेल की मौजूदा तेजी का असर महंगाई, रुपये और शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल निवेशकों की नजर मध्य पूर्व की स्थिति और वैश्विक सप्लाई चेन पर बनी हुई है।

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