दुर्ग

शिवनाथ नदी पर मंडरा रहा खतरा — दुर्ग की जीवनदायिनी नदी बन रही प्रदूषण की शिकार, नगर निगम की लापरवाही उजागर

कभी आस्था की प्रतीक, अब प्रदूषण की गिरफ्त में शिवनाथ नदी

दुर्ग की शान और जीवनदायिनी शिवनाथ नदी इन दिनों अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है।जहां केंद्र सरकार नदियों के संरक्षण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण पर अरबों रुपये खर्च कर रही है, वहीं नगर निगम दुर्ग की लापरवाही के चलते यह पवित्र नदी धीरे-धीरे “नाले” में बदलती जा रही हैस्थानीय ।निवासियों का आरोप है नगर निगम की नालियों और सीवेज का गंदा पानी सीधे नदी में गिराया जा रहा है। लगातार बहने वाले इस अपशिष्ट जल ने नदी के जलस्तर और गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है।

कचरा प्रबंधन ठप, शिवनाथ पर संकट
नगर निगम दुर्ग के पोटिया क्षेत्र में पहले ट्रेंचिंग ग्राउंड हुआ करता था, जहां शहर का कचरा विधिवत तरीके से निपटाया जाता था।
लेकिन राजनीतिक विवादों और स्थानीय विरोध के चलते वह बंद हो गया।अब तक कोई नया सेग्रीगेशन प्लांट या डंपिंग साइट शुरू नहीं की जा सकी, जिसके चलते पूरा कचरा प्रबंधन सिस्टम चरमरा गया है।NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) की गाइडलाइन के बावजूद, पुराने डंपिंग क्षेत्र की सफाई नहीं की जा रही है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार द्वारा वहां का कचरा उठाकर सीधे नालों में बहाया जा रहा है, जो अंततः शिवनाथ नदी में मिलकर जल प्रदूषण बढ़ा रहा है।

गजेंद्र यादव, शिक्षा मंत्री/ विधायक दुर्ग शहर

संजय कोहले, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम दुर्ग

सुमित अग्रवाल ,कमिश्नर, नगर निगम दुर्ग

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