बस्तर

आबुझमाड़ में माओवाद को करारा झटका

नारायणपुर में 80% नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के आबुझमाड़ क्षेत्र से एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में अब माओवादी संगठन तेजी से कमजोर हो रहे हैं।

जिला पुलिस अधीक्षक (SP) रॉबिन्सन गुरिया ने बताया कि हाल के महीनों में करीब 80 प्रतिशत माओवादी कार्यकर्ताओं ने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह छत्तीसगढ़ में माओवादी विरोधी अभियान की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।

आत्मसमर्पण करने वालों में स्थानीय जनमिलिशिया सदस्य, एरिया कमेटी के कैडर और महिला माओवादी शामिल हैं। इन सभी ने प्रशासन के सामने हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।

पुलिस और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से आबुझमाड़ के दुर्गम इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अब इन इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और राशन व्यवस्था जैसी विकास योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि विकास और विश्वास की नीति ने माओवादियों पर गहरा असर डाला है।

एसपी गुरिया ने कहा —

“अबुझमाड़ के लोग बदलाव चाहते हैं। उन्होंने हिंसा की राह छोड़कर शांति और विकास का साथ देने का फैसला किया है। यह अभियान जनता और सुरक्षा बलों दोनों की जीत है।”

इस आत्मसमर्पण अभियान के तहत माओवादियों को पुनर्वास योजना का लाभ दिया जा रहा है, जिसमें आवास, रोजगार और सुरक्षा की गारंटी शामिल है।

राज्य सरकार ने इसे “शांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया है कि सरकार हर उस व्यक्ति को मौका देना चाहती है जो हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहता है।

यह आत्मसमर्पण न केवल छत्तीसगढ़ में नक्सल नेटवर्क को कमजोर करेगा, बल्कि यह सुरक्षा बलों की रणनीतिक सफलता और स्थानीय जनसहयोग के बढ़ते प्रभाव का प्रमाण भी है।

आबुझमाड़ जैसे इलाकों में शांति स्थापित होना राज्य की विकास और स्थिरता नीति के लिए निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

“80% नक्सलियों का आत्मसमर्पण — अबुझमाड़ में माओवाद को करारा झटका।”

“विकास और संवाद की नीति से सरकार को मिली सफलता।”

“हिंसा छोड़ विकास की राह पर लौट रहे हैं जंगलों के लोग।”

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