निस्तार भूमि पर बेजा कब्जे को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन, 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

जांजगीर
जिले के बलौदा तहसील अंतर्गत ग्राम शनिचराडीह में निस्तार भूमि पर कथित बेजा कब्जे को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बुधवार को खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में ग्रामीण हाथों में तख्तियां लेकर कलेक्टर कार्यालय की ओर कूच करने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले ही रोक दिया।
ग्रामीण “हमारी मांगें पूरी करो” और “बेजा कब्जा हटाओ” जैसे नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट मार्ग पर प्रदर्शन करते रहे। मौके पर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और मीडिया से बातचीत कर अपनी पीड़ा सामने रखी।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की शासकीय निस्तार भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इसके चलते गांव में तालाब निर्माण, गोठान, पौधरोपण और अन्य सामुदायिक उपयोग के लिए कोई भी खाली भूमि शेष नहीं बची है। ग्रामीणों का कहना है कि निस्तार की भूमि खत्म होने से गांव के विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम एक लिखित आवेदन सौंपा, जिसमें अतिक्रमण हटाने, भूमि की पुनः माप-जोख कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा—
“हमारे गांव में बड़ी मात्रा में बेजा कब्जा हो गया है। निस्तार के लिए जमीन नहीं बची है। तालाब, गोठान और पौधरोपण जैसे जरूरी काम नहीं हो पा रहे। अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन और तेज होगा।”
वहीं, जांजगीर एसडीएम ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि यह प्रकरण तहसील बलौदा में पहले से लंबित है। उन्होंने कहा कि तहसीलदार के माध्यम से जांच कराई जाएगी और 15 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन ग्रामीणों को दिया गया है।
ग्रामीण प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि वे प्रशासन को दिए गए समय तक इंतजार करेंगे, लेकिन यदि तय अवधि में कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन करेंगे।
अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि 15 दिनों के भीतर अतिक्रमण पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या ग्रामीणों को उनकी निस्तार भूमि वापस मिल पाती है या नहीं।




