जल जीवन मिशन पर जिला पंचायत की सख्ती – अब सदस्य करेंगे गांवों में नल जल योजना की हकीकत की जांच

जांजगीर-चांपा
जिले में जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा बैठक में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई गांवों में आज भी घर-घर नल से पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला पंचायत की सामान्य सभा ने बड़ा निर्णय लिया है — अब जिला पंचायत सदस्य स्वयं गांव-गांव जाकर जलापूर्ति व्यवस्था की वास्तविक जांच करेंगे।
जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित इस बैठक में जल जीवन मिशन के कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। सदस्यों ने बताया कि योजनाओं के तहत पाइपलाइन तो अधिकांश गांवों में बिछा दी गई है, लेकिन कई जगह नल सूखे पड़े हैं और जलापूर्ति ठप है। ग्रामीणों को अब भी पुराने कुओं, हैंडपंपों और तालाबों से पानी लाना पड़ रहा है।


समीक्षा के दौरान सदस्यों ने विभागीय अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए कहा कि मिशन का उद्देश्य केवल आंकड़ों और रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका लाभ हर घर तक स्वच्छ पेयजल के रूप में दिखना चाहिए।
बैठक में यह भी तय किया गया कि आने वाले दिनों में पंचायत सदस्य स्वयं क्षेत्रीय दौरे करेंगे और गांवों की जलापूर्ति व्यवस्था की स्थिति का प्रत्यक्ष मूल्यांकन करेंगे। इस दौरान जहां लापरवाही पाई जाएगी, वहां संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
जिला पंचायत सदस्यों ने कहा कि जल जीवन मिशन केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य हर परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। लेकिन अगर जमीनी स्तर पर अमला गंभीर नहीं हुआ, तो योजनाएं केवल फाइलों और कागजों तक सीमित रह जाएंगी।
“कई गांवों में योजना लागू जरूर दिखती है, लेकिन नलों में पानी नहीं आता। अब जांच से स्थिति स्पष्ट होगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।”
— जिला पंचायत सदस्य
बैठक में फ्लाई ऐश उपयोग, पर्यावरण अनुमति और निगरानी तंत्र को लेकर भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, सदस्यों ने जलापूर्ति व्यवस्था में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और गांव स्तर पर निगरानी समितियां बनाने की भी सिफारिश की।
फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार प्रशासन की सख्ती से स्थिति बदलेगी और उनका गांव सचमुच “हर घर जल” के लक्ष्य तक पहुंचेगा। अन्यथा, योजनाओं का सपना एक बार फिर प्यासे गांवों की हकीकत में तब्दील हो जाएगा।




