घरेलू हिंसा कानून का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, FIR निरस्त

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए पति और उसकी बहनों के खिलाफ दर्ज FIR को निरस्त कर दिया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल किसी पर दबाव बनाने या परेशान करने के लिए नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि डोमेस्टिक इंसीडेंट रिपोर्ट अस्पष्ट हो, उसमें यह स्पष्ट न हो कि घटना कब, कहां और किसने की, और मामला वैवाहिक विवाद या बच्चों की कस्टडी में दबाव बनाने के उद्देश्य से दायर किया गया हो, तो ऐसी कार्यवाही कानून का दुरुपयोग मानी जाएगी।
मामला सूरजपुर JMFC कोर्ट में चल रही घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की कार्यवाही से जुड़ा था, जिसे उत्तरप्रदेश के बलिया निवासी पति और उसकी बहनों ने चुनौती दी थी। कोर्ट ने पाया कि रिपोर्ट में ठोस तथ्य और विशिष्ट आरोपों का अभाव है, इसलिए निचली अदालत का आदेश रद्द किया गया।
यह फैसला घरेलू हिंसा मामलों में स्पष्ट तथ्यों और जिम्मेदार जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है।




