टेक्नोलॉजी

चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री लगाएंगे Elon Musk: सूरज की ऊर्जा कैप्चर कर बनाएंगे स्पेस डेटा सेंटर, xAI मीटिंग में बड़ा खुलासा

वॉशिंगटन। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलॉन मस्क ने चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री लगाने की महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया है। मस्क ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI की 45 मिनट लंबी इंटरनल मीटिंग का वीडियो साझा करते हुए बताया कि कंपनी भविष्य में सूरज की ऊर्जा को सीधे अंतरिक्ष से कैप्चर करने की दिशा में काम करेगी।
मस्क के अनुसार, पृथ्वी पर सीमित ऊर्जा संसाधनों के कारण एआई के विकास की एक सीमा है। ऐसे में चांद को एक इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित कर लाखों AI सैटेलाइट्स तैयार किए जाएंगे, जिन्हें अंतरिक्ष में तैनात कर सौर ऊर्जा को बड़े पैमाने पर संग्रहित किया जा सकेगा।
चांद से डीप स्पेस में लॉन्च होंगे AI सैटेलाइट
मस्क ने बताया कि चांद की कम गुरुत्वाकर्षण शक्ति सैटेलाइट लॉन्चिंग को सस्ता और आसान बनाएगी। वहां ‘मास ड्राइवर’ नामक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉन्चर लगाया जाएगा, जो AI सैटेलाइट्स को सीधे डीप स्पेस में भेज सकेगा।
इन सैटेलाइट्स में लगे सोलर पैनल सूरज की असीमित ऊर्जा को कैप्चर करेंगे। शुरुआती चरण में इस ऊर्जा का उपयोग स्पेस डेटा सेंटर्स को चलाने में किया जाएगा, जिससे एआई मॉडल्स को अत्यधिक कंप्यूटिंग पावर मिल सकेगी। मस्क का दावा है कि अगर मानवता सूरज की ऊर्जा का 10 लाखवां हिस्सा भी हासिल कर ले, तो वह आज की वैश्विक ऊर्जा खपत से लाखों गुना ज्यादा होगी।
‘डाइसन स्फीयर’ जैसा विजन, पूरे सौर मंडल में बस सकती हैं मानव बस्तियां
मस्क का यह विजन ‘डाइसन स्फीयर’ जैसी अवधारणा पर आधारित है, जिसमें किसी तारे के चारों ओर संरचनाएं बनाकर उसकी ऊर्जा को पूरी तरह उपयोग में लाया जाता है।
मस्क के मुताबिक, चांद से भेजे जाने वाले AI सैटेलाइट्स धीरे-धीरे सूरज के चारों ओर ऊर्जा संग्रहण का नेटवर्क बना सकते हैं। इससे भविष्य में बड़े स्पेसशिप बिना ईंधन की चिंता के संचालित हो सकेंगे और इंसानी बस्तियां पूरे सौर मंडल में बसाई जा सकेंगी। अंतरिक्ष में ही भोजन और संसाधन उत्पादन की दिशा में भी काम किया जाएगा।
xAI में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, फाउंडिंग टीम के आधे सदस्य बाहर
मीटिंग के दौरान मस्क ने यह भी खुलासा किया कि xAI की फाउंडिंग टीम के 12 सदस्यों में से अब केवल 6 ही कंपनी में बचे हैं। उन्होंने इसे संगठनात्मक ढांचे में बदलाव बताया।
कंपनी को चार प्रमुख टीमों में बांटा गया है—ग्रोक टीम (चैटबॉट और वॉइस), कोडिंग टीम, इमेजिन टीम (वीडियो जनरेशन) और ‘मैक्रोहार्ड’ प्रोजेक्ट। ‘मैक्रोहार्ड’ का लक्ष्य एआई के जरिए पूरी कंपनियों का डिजिटल सिमुलेशन बनाना है, ताकि सप्लाई चेन से लेकर बिजनेस फैसलों तक सब कुछ वर्चुअली टेस्ट किया जा सके।
AI खुद डिजाइन करेगा रॉकेट इंजन
मस्क का दावा है कि भविष्य में एआई न केवल सॉफ्टवेयर लिखेगा, बल्कि जटिल मशीनों और रॉकेट इंजनों के डिजाइन भी तैयार करेगा। उनका कहना है कि आने वाले महीनों में ‘ग्रोक कोड’ दुनिया का अग्रणी कोडिंग मॉडल बन सकता है, जो सीधे बाइनरी स्तर पर प्रोग्राम तैयार करेगा।
मस्क के अनुसार, साल के अंत तक ऐसी स्थिति आ सकती है जहां इंसानों को पारंपरिक कोडिंग की जरूरत न पड़े और एआई स्वतः संपूर्ण प्रोग्राम विकसित कर सके।
20 मिनट तक के वीडियो बनाएगा AI मॉडल
xAI की ‘इमेजिन’ टीम ऐसे मॉडल पर काम कर रही है जो एक बार में 10 से 20 मिनट तक का लंबा वीडियो जनरेट कर सकेगा। यह प्रक्रिया लगभग पूरी तरह ऑटोमेटेड होगी।
‘मेम्फिस क्लस्टर’ बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा GPU सिस्टम
मस्क ने बताया कि उनके पास दुनिया का सबसे बड़ा GPU क्लस्टर है, जिसे ‘मेम्फिस क्लस्टर’ कहा जा रहा है। यह 24 घंटे सक्रिय रहकर ग्रोक एआई मॉडल को ट्रेन करता है। डेटा सेंटर का बड़ा हिस्सा महज छह हफ्तों में तैयार किया गया और इसमें हजारों किलोमीटर लंबी फाइबर केबल बिछाई गई है। पूरा सिस्टम एक गीगावाट से अधिक बिजली की खपत करेगा।
‘एवरीथिंग एप’ बनाने की तैयारी
वॉइस टीम ने जानकारी दी कि छह महीनों में स्क्रैच से तैयार किया गया वॉइस मॉडल अब प्रतिस्पर्धी स्तर पर पहुंच चुका है। लक्ष्य केवल चैटबॉट तक सीमित नहीं, बल्कि एक ‘एवरीथिंग एप’ विकसित करना है, जिसमें कम्युनिकेशन, कोडिंग, वीडियो और बिजनेस टूल्स एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हों।

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