सोने की कीमतों में गिरावट: निवेशकों के लिए सुनहरा मौका या जोखिम? जानिए विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हालिया गिरावट ने निवेशकों का ध्यान फिर से इस पीली धातु की ओर खींचा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा गिरावट अल्पकालिक झटका जरूर है, लेकिन दीर्घकाल में यह निवेशकों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है।
पिछले महीने 20 अक्टूबर को सोने की कीमतें $4,381.5 प्रति औंस के स्तर तक पहुंची थीं — जो कि 200-दिन की चलती औसत (200-DMA) से लगभग 33 प्रतिशत अधिक थीं। लेकिन इसके बाद मुनाफावसूली के चलते कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
गिरावट में छिपा निवेश अवसर
जेफरिज के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रैटेजी हेड क्रिस्टोफर वुड ने अपनी रिपोर्ट “Greed & Fear” में कहा है कि अगर सोने में और करेक्शन आता है तो यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए “बेहतर खरीदारी का मौका” हो सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल 200-DMA लगभग $3,371 प्रति औंस पर है, जो हालिया ऊंचे स्तर से करीब 23% नीचे है।
एक साल में 50% से ज्यादा उछाल
पिछले एक वर्ष में सोना उन कुछ संपत्तियों में शामिल रहा जिसने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिए। इस अवधि में सोने की कीमतों में 53% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका की कठोर व्यापार नीतियां और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने सोने को निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना दिया।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की शुरुआत से अब तक केंद्रीय बैंकों ने 200 टन सोना खरीदा है, जिसमें पोलैंड (67 टन), कजाखस्तान (40 टन) और अज़रबैजान (38 टन) सबसे बड़े खरीदार रहे हैं।
“कंसोलिडेशन फेज” में सोने का बाजार
स्विट्ज़रलैंड की बैंकिंग संस्था Julius Baer का अनुमान है कि सोना अब “कंसोलिडेशन फेज” में प्रवेश कर चुका है और आने वाले महीनों में इसकी कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं। फर्म के ग्रुप CIO Yves Bonzon का कहना है कि अगर कीमतें $3,500 प्रति औंस के आसपास गिरती हैं तो वे इसे खरीदारी का अवसर मानेंगे, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में राजकोषीय दबाव और G7 देशों की कमजोर मुद्राएँ निकट भविष्य में खत्म होने की संभावना नहीं हैं।
अमेरिकी मंदी की आशंका से बढ़ा भरोसा
अमेरिका की आर्थिक स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता ने भी सोने को समर्थन दिया है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन का कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स नवंबर में 50.3 पर गिर गया, जो 2022 के बाद सबसे निचला स्तर है। एमके ग्लोबल की कमॉडिटी एनालिस्ट रिया सिंह का कहना है कि डॉलर और ट्रेजरी यील्ड्स पर दबाव से सोना फिर से “सेफ हेवन” निवेश के रूप में उभर रहा है।
हालांकि, अगर अमेरिकी सरकार जल्द वित्तीय संतुलन बना लेती है, तो यह सुरक्षित निवेश की मांग को कम कर सकता है और सोने की तेजी को रोक सकता है।
तकनीकी दृष्टि से कहाँ है सपोर्ट और रेजिस्टेंस?
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार,
पहला मुख्य सपोर्ट स्तर: $3,800 प्रति औंस,दीर्घकालिक महत्वपूर्ण सपोर्ट: $3,500 प्रति औंस,प्रमुख रेजिस्टेंस ज़ोन: $4,420 से $4,675 प्रति औंस के बीच है।
विशेषज्ञों की राय है कि निवेशकों को इन स्तरों पर सतर्क रहना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो की रणनीति उसी हिसाब से तय करनी चाहिए।




