ठंड में हक की लड़ाई — गरियाबंद में किसान परिवार भूख हड़ताल पर, वादाखिलाफी से नाराज़ मुरहा नागेश बोले– अब भरोसे नहीं, हक चाहिए

गरियाबंद
जिले से एक भावुक और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां ठंड के मौसम में एक किसान परिवार अपनी ही जमीन के मालिकाना हक की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठा है। चार महीने पहले भी इन्हीं किसानों ने ऐसा ही आंदोलन किया था, तब प्रशासन ने आश्वासन दिया था — लेकिन वादा आज तक अधूरा है।
गरियाबंद में कड़कड़ाती ठंड के बीच खरी पथरा गांव के किसान मुरहा नागेश अपने पूरे परिवार के साथ गांधी मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मुरहा नागेश का कहना है कि वह अपनी ही पुश्तैनी जमीन के मालिकाना हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब तक न्याय नहीं मिला।


करीब चार महीने पहले भी उन्होंने इसी मांग को लेकर कलेक्टरेट कार्यालय के सामने भूख हड़ताल की थी। तब अमलीपदर तहसीलदार ने दो महीने के भीतर जमीन का अधिकार दिलाने का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक वह वादा पूरा नहीं हुआ।
इस दौरान दबंगों ने किसान के खेत में खड़ी फसल तक नष्ट कर दी, जिसकी शिकायत प्रशासन से की गई, मगर कार्रवाई नहीं हुई। निराश और नाराज़ मुरहा नागेश अब दोबारा आंदोलन पर उतर आए हैं। उनका कहना है —
“अब किसी लिखित भरोसे पर नहीं मानेंगे, जब तक जमीन वापस नहीं मिलती, तब तक परिवार सहित गांधी मैदान में डटे रहेंगे।”
वहीं, इस पूरे मामले पर अमलीपदर तहसीलदार का कहना है कि –
“सिर्फ मुरहा नागेश की ही नहीं, बल्कि पूरे गांव की जमीन में तकनीकी और सीमांकन संबंधी समस्या है। प्रक्रिया में समय लग रहा है, इसमें एक से दो माह और लग सकते हैं।”
इस बीच, स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से अपील की है कि किसान की पीड़ा को गंभीरता से लेकर जल्द से जल्द न्याय दिलाया जाए, ताकि ठंड में परिवार की जान को खतरा न हो।
“हम लोग बस अपनी ही जमीन पर हक मांग रहे हैं, कोई गैर की चीज नहीं मांग रहे। ठंड में बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब भी खामोश है।”
