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कांग्रेस के नए जिला अध्यक्ष राजेश अग्रवाल की पहली प्रेसवार्ता, CM के पुतले का दहन कर जताया गाइडलाइन दरों के विरोध का प्रदर्शन

जांजगीर चांपा

गाइडलाइन दरों में 10% से 100% तक वृद्धि—विपक्ष ने बताया अतिरेकी फैसला; बेरोजगारी और आर्थिक मंदी बढ़ने की आशंका

राज्य सरकार द्वारा जमीन की गाइडलाइन दरों में 10 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी किए जाने के फैसले ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। कांग्रेस ने इस निर्णय को “अनुचित, अदूरदर्शी और आम जनता पर बोझ डालने वाला कदम” बताया है। पार्टी का आरोप है कि इस निर्णय से न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, बल्कि रियल एस्टेट कारोबार ठप होगा, लोगों के घर–दुकान–कारखाने महंगे होंगे, बेरोजगारी और बढ़ेगी।

कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार के आने के बाद से जमीन की सरकारी दरें पहले ही 40 से 500 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, और अब गाइडलाइन बढ़ाकर आम जनता को और परेशान किया जा रहा है।

गाइडलाइन दरें बढ़ने से बढ़ेगा भारी बोझ

कांग्रेस नेताओं के अनुसार—

पिछले एक वर्ष में जमीन की गाइडलाइन दर 130% से 500% तक बढ़ चुकी है।

मुंबई, दिल्ली, पुणे और बड़े शहरों में 10–15% की बढ़ोतरी सालाना होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इससे कई गुना ज्यादा बढ़ोतरी की गई है।

इससे जमीन खरीदना-बेचना मुश्किल हो जाएगा, जिसके कारण रियल एस्टेट क्षेत्र में मंदी आएगी।

पार्टी ने आरोप लगाया कि किसानों की कृषि भूमि खरीदने पर भी स्टांप ड्यूटी बढ़ाई जा रही है, जिससे किसानों की जमीन बेचना बंद हो सकता है।

किसानों और छोटे भू-स्वामियों पर दोहरा असर

कांग्रेस ने कहा कि—

सरकार पहले ही 5 डिस्मिल से कम जमीन की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगा चुकी है, जिससे गरीब आदमी घर नहीं बना पा रहा।

जिनके पास केवल 1000–2000 वर्गफुट जमीन है, वे उसे बेच या खरीद नहीं सकते।

अब गाइडलाइन दरें बढ़ने से किसानों और गरीबों की समस्या और बढ़ेगी।

रियल एस्टेट पर भारी असर—घर बनाना होगा मुश्किल

कांग्रेस ने उदाहरण देते हुए बताया—

अगर 30 लाख की जमीन पर पहले 22 लाख की स्टांप ड्यूटी लगती थी, तो अब वही जमीन कई जगह 4 लाख तक महंगी हो जाएगी।

1000 वर्गफुट जमीन की खरीद पर रजिस्ट्री और कर बढ़ जाने से आम आदमी घर बनाने की सोच भी नहीं पाएगा।

इससे निर्माण उद्योग में मंदी आएगी, मजदूरों की मजदूरी और रोजगार प्रभावित होंगे।

पार्टी ने कहा—
“सरकार का यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर को खत्म कर देगा।”

सरकार पर मनमानी का आरोप—‘अर्थव्यवस्था संभालने में असफल’

कांग्रेस ने दावा किया—

सरकार के पास योजनाओं को चलाने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए वह टैक्स बढ़ाकर बोझ जनता पर डाल रही है।

जमीन की गाइडलाइन बढ़ाने के साथ ही बिजली के दाम बढ़ाए गए और 400 यूनिट फ्री बिजली योजना भी खत्म कर दी गई।

रियल एस्टेट के साथ-साथ पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था मंदी के खतरे में है।

कांग्रेस ने बयान में कहा—

“यह फैसला जानबूझकर जनता को परेशान करने के लिए लिया गया है। इससे रोजगार घटेगा, आर्थिक गतिविधि थमेगी और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।”

गाइडलाइन की दर में बढ़ोत्तरी के कारण कांग्रेस द्वारा CM का कचहरी चौक पर पुतला दहन किया गया |

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