
सक्ति जिला
रिपोर्टर लाला उपाध्याय
छत्तीसगढ़ प्रदेश भर में आज लोकपर्व, छेरछेरा, पुन्नी हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। इसी कड़ी में सक्ती जिले के नगर पंचायत डभरा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी छेरछेरा पर्व की विशेष रौनक देखने को मिली। सुबह से ही नगर और गांवों में उत्सव का माहौल बना रहा।पर्व के अवसर पर छोटे-छोटे बच्चे और युवा टोली बनाकर गली-मोहल्लों में घूमते नजर आए। बच्चे घर-घर जाकर पारंपरिक रूप से, छेरछेरा, कोठी के धान ल हेर-हेरा का उद्घोष करते हुए धान और भेंट स्वरूप दान एकत्र करते दिखे।


लोगों ने भी उत्साहपूर्वक बच्चों को अन्नदान कर लोकपरंपरा का निर्वहन किया। पूरे क्षेत्र में लोकसंस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली।गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का छेरछेरा पर्व धान और अन्न के दान का सबसे बड़ा लोकपर्व माना जाता है। यह पर्व पौष पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और इसे शाकंभरी जयंती के रूप में भी जाना जाता है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में रुपये-पैसों की बजाय अन्नदान को विशेष महत्व दिया जाता है।छेरछेरा तिहार को महादान और फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की सामाजिक समरसता, दानशीलता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। साथ ही यह आपसी भाईचारे और सहयोग का संदेश देता है।किसान साल भर मेहनत कर खेतों में फसल उगाते हैं और कटाई के बाद जब अन्न घर आता है, तब छेरछेरा पर्व के रूप में साल का पहला त्योहार मनाया जाता है। यही कारण है कि किसानों के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है और पूरे उत्साह व परंपरागत उल्लास के साथ मनाया जाता है।





