छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर बिक रही पानी की बोतल में फंगल/काई, यात्रियों की सेहत से खिलवाड़!

रिपोर्टर-दीपक यादव/लोकेशन-जांजगीर-चांपा

जांजगीर-चांपा रेलवे स्टेशन से एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर तस्वीर सामने आई है, जहां प्लेटफॉर्म नंबर-2 स्थित कैंटीन में बिक रही पैक्ड पानी की बोतल में फंगल या काई जैसी परत पाई गई है। यह मामला सीधे तौर पर यात्रियों की सेहत और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।


बताया जा रहा है कि संबंधित बोतल O2 Drops ब्रांड की है, जिसका निर्माण BluEra Solutions, बिलासपुर द्वारा किया गया है। बोतल पर ISI 14543 मानक और एफएसएसएआई लाइसेंस का उल्लेख भी दर्ज है। इतना ही नहीं, लेबल पर “Foreign Particles/Precipitate Seen” होने पर बोतल न खरीदने की चेतावनी भी लिखी हुई है, लेकिन इसके बावजूद बोतल के अंदर हरे रंग की काई जैसी परत साफ नजर आना गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
ग्राहक का आरोप है कि जब इस मामले की शिकायत कंपनी के कस्टमर केयर नंबर पर की गई, तो समस्या के समाधान के बजाय कंपनी प्रतिनिधि ने ग्राहक से बदसलूकी की। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है और इसे उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया जा रहा है।
वहीं, कैंटीन संचालक ने सफाई देते हुए कहा कि भीड़ के दौरान कार्टून से बोतल निकालकर दी गई थी। बाद में अन्य ग्राहकों की शिकायत पर बोतल में फंगल होने की जानकारी मिली। संचालक का दावा है कि उन्होंने ग्राहक से बोतल वापस लेकर दूसरी बोतल देने का आग्रह किया था और कंपनी को भी इसकी सूचना दी गई थी। हालांकि, कंपनी स्तर पर क्या कार्रवाई हुई, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अब इस पूरे मामले में रेलवे प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी संदिग्ध गुणवत्ता वाली पानी की बोतलों को रेलवे परिसर में बेचने की अनुमति किस आधार पर दी गई? क्या रेलवे बोर्ड या संबंधित विभाग की विधिवत स्वीकृति है?
जब इस संबंध में रेलवे के कंज्यूमर इंस्पेक्टर से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि यह जानकारी उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और इसके लिए रेलवे के PRO से संपर्क किया जाए।
यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन, एफएसएसएआई और रेलवे प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित बैच के सैंपल की लैब जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर में किसी भी प्रकार की फंगल या काई की मौजूदगी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे में रेलवे जैसे सार्वजनिक स्थलों पर बिकने वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों की नियमित और सख्त निगरानी बेहद जरूरी है।
अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन और संबंधित कंपनी इस मामले में क्या कदम उठाती है और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button