राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49(6) से छत्तीसगढ़ को भारी नुकसान, विधानसभा में सरकार ने किया स्वीकार

ब्यूरो रिपोर्ट | छत्तीसगढ़
मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) को लेकर छत्तीसगढ़ के पेंशनरों और राज्य सरकार को हो रहे आर्थिक नुकसान का मुद्दा अब खुलकर सामने आ गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा में यह स्वीकार किया है कि इस धारा के कारण राज्य को पेंशन मद में भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।
पेंशनर और पारिवारिक पेंशनरों के हित में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठन भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ पिछले कई वर्षों से यह मांग करता आ रहा है कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) को समाप्त किया जाए। संगठन का कहना है कि इस प्रावधान के चलते छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों को नुकसान हो रहा है, साथ ही राज्य सरकार को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये की आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है।

महासंघ का दावा है कि केवल इस धारा के कारण छत्तीसगढ़ सरकार को प्रतिवर्ष लगभग दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। संगठन द्वारा इस मुद्दे को छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “सुशासन तिहार” के तहत भी प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन लंबे समय तक वित्त विभाग के आला अधिकारियों ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया।
हालांकि, अब विधानसभा के बजट सत्र में वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने अपने बजट भाषण में यह स्पष्ट किया कि पेंशन मद में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये मध्यप्रदेश सरकार से प्राप्त किए जाने हैं। इस स्वीकारोक्ति के बाद यह मुद्दा और अधिक गंभीर हो गया है। महासंघ का आरोप है कि जिम्मेदार वित्त अधिकारियों की लापरवाही के कारण राज्य सरकार को वर्षों से भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
बजट सत्र से पहले भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ ने सरकार से यह भी अपेक्षा की थी कि पेंशनरों की लंबित मांगों पर विधानसभा में ठोस घोषणा की जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से
जुलाई 2025 से 3% महंगाई राहत का एरियर्स सहित भुगतान,
सभी जिलों में पृथक पेंशन कार्यालयों की स्थापना,
वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग का गठन,
पेंशनर कल्याण निधि के बजट में वृद्धि,
तथा पेंशनरों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करना शामिल है।
इस बीच भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ की जिला शाखा जांजगीर-चांपा के अध्यक्ष परमेश्वर स्वर्णकार ने सरकार से मांग की है कि चालू बजट सत्र में चर्चा के दौरान पेंशनरों के हित में ठोस और सकारात्मक निर्णय लिए जाएं, ताकि पेंशनरों में व्याप्त निराशा दूर हो सके और यह बजट वास्तव में “समावेशी बजट” साबित हो।




