जांजगीर-चांपा

संसाधनों के बावजूद संघर्ष कर रहे सरकारी स्कूल

लेकिन पूरे जिले में बिना भवन वाले प्राइवेट स्कूलों को मिल रही मान्यता!
शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

नवागढ़
जहाँ सरकारी स्कूल सीमित संसाधनों, कम शिक्षकों और घटती छात्रसंख्या के बीच भी बच्चों को शिक्षित करने का दायित्व निभा रहे हैं, वहीं पूरे जिले में बिना भवन, बिना खेल मैदान और बिना मूलभूत सुविधाओं वाले प्राइवेट स्कूलों को मनमाने तरीके से मान्यता देना शिक्षा विभाग की नीतियों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

शासकीय प्राथमिक शाला जोबी-खोखसा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह स्कूल मात्र 2 शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहा है और इसमें कुल 11 छात्र पढ़ रहे हैं—
कक्षा 1: 2
कक्षा 2: 0
कक्षा 3: 4
कक्षा 4: 5
कक्षा 5: 0

कम बच्चों के बावजूद शिक्षक नियमित रूप से स्कूल का संचालन कर रहे हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास जारी है। यह सरकारी शिक्षा तंत्र की मेहनत और ईमानदारी को दर्शाता है।

लेकिन सवाल बड़ा है—सरकारी स्कूल खाली और प्राइवेट स्कूल भरे क्यों?
जिले में बड़ी संख्या में ऐसे प्राइवेट संस्थान चल रहे हैं—
जिनके पास अपना भवन नहीं,खेल का मैदान नहीं,बच्चों के सुरक्षा मानक पूरे नहीं,मूलभूत आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध नहीं।

इसके बावजूद ऐसे स्कूलों को मान्यता देना गंभीर लापरवाही है।
इनकी वजह से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।

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